Skip to main content

इंदौर में पहली बार टैंडम पैराग्लाइडिंग फेस्टिवल, आसमान में उड़ान का रोमांच!!

सागर नगर के इतिहास पुरुष विषय पर हुई परिचर्चा !!

 सागर नगर के इतिहास पुरुष विषय पर हुई परिचर्चा

"दांगी राजपूतों व मराठा शासन के इतिहास के विशद अध्ययन की आवश्यकता" - विधायक श्री शैलेंद्र जैन


    सागर शहर के इतिहास पर लेखन, अध्यापन रुचि रखने वाले सुधिजनों के समूह ने एक साथ बैठ कर "सागर नगर का संस्थापक कौन" विषय पर एक परिचर्चा की जिसमें कुछ निष्कर्षों तक पहुंचने की कोशिश की गई । अपर कलेक्टर सागर श्री रूपेश कुमार उपाध्याय की पहल पर यह बैठक विधायक श्री शैलेन्द्र जैन की उपस्थिति में समाजसेवी लेखिका श्रीमती नीलिमा पिंपलापुरे के निवास पर आयोजित की गईं।

    बैठक में अपर कलेक्टर श्री उपाध्याय ने विषय प्रवर्तन किया। उन्होंने कहा कि हमें सागर नगर के इतिहास के उन महापुरूषों को चिन्हित करना चाहिए जिनका सर्वाधिक योगदान सागर की स्थापना और इसके व्यवस्थित स्वरूप देने में रहा है। उन्होंने कहा कि सागर के संस्थापक के रूप में दांगी राजपूत शासक उदयन शाह का नाम आता है, लेकिन उनके द्वारा स्थापित नगर को वृहद और नियोजित आकार देने में मराठा शासक गोविंद पंत खैर जिन्हें गोविंद पंत बुंदेले के नाम से मराठा इतिहास में जाना जाता है, उनके योगदान को और विस्तार से देखे जाने की आवश्यकता है।
    परिचर्चा में विधायक श्री शैलेन्द्र जैन ने कहा कि नगर की पुरातन विरासत के संरक्षण में सरकार निरंतर संलग्न हैं। विरासत के संरक्षण कार्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि नगर में मौजूद प्राचीन स्मारकों के संरक्षण, उनके प्रचार प्रसार और पर्यटन क्षेत्र के रूप में नगर के विकास के लिए सागर के इतिहास की तथ्यात्मक जानकारी पर और अधिक काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सागर में मराठा कालीन इतिहास का अभी तक सही मूल्यांकन नहीं हुआ है।
    सागर के इतिहास के अध्येता डा रजनीश जैन ने सागर नगर के चार कालखंडों में हुए क्रमिक विकास जानकारी परिचर्चा में रखी। आरंभिक बसाहट से ब्रिटिश कालीन इतिहास पर उन्होंने प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सागर में दांगी राजपूत शासनकाल और मराठा कालीन इतिहास, उस दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं और नगर के निर्माण के चरणों को समझने के लिए प्रामाणिक एतिहासिक साक्ष्य जुटाए जाने की आवश्यकता है। राजस्थान के राजकीय व रजवाड़ों के संदर्भ ग्रंथालयों, पुणे के शनिवार वाड़ा स्थित पेशवा दफ्तर के पत्राचारों व पन्ना के महाराज छत्रसाल के वंशजों के संग्रह में मौजूद एतिहासिक संदर्भ सामग्री को जुटा कर उनके व्यवस्थित अध्ययन से सागर के प्रामाणिक वास्तविक इतिहास लेखन की आवश्यकता है। उन्होंने इन सभी राज दरबारों में रहे कवि, साहित्यकारों और विद्वानों के साहित्य को भी एतिहासिक संदर्भ में अध्ययन किए जाने पर जोर दिया।
    डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर वीपी श्रीवास्तव ने गोविंद पंत खैर और बाजीराव पेशवा के जुड़ाव और खैर वंश परंपरा के सागर के शासकों पर प्रकाश डाला। प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के अध्यक्ष नागेश दुबे ने सागर के स्मारकों पर अपने विचार रखे।

    परिचर्चा में समाजसेवी लेखिका श्रीमती नीलिमा पिंपलापुरे द्वारा लिखित बुंदेलखंड के इतिहास पुस्तक की सराहना की गई और उनके द्वारा मराठा शासक गोविंद पंत खैर पर लिखे गए आलेख पर चर्चा हुई। श्रीमती पिंपलापुरे ने सागर इतिहास के महापुरुषों के योगदान और मराठा इतिहास को पुनः व्याख्यित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
    परिचर्चा में सागर ट्रैकर्स के प्रमुख अतुल जैन बहेरिया, ईएमआरसी के डायरेक्टर पंकज तिवारी, इंटेक सागर चेप्टर के को-कन्वीनर अनिरुद्ध पिंपलापुरे, व्याख्याता प्रफुल्ल हलवे, वरिष्ठ फोटो ग्राफर गोविंद सरवैया ने भी महत्वपूर्ण विचार रखे।

- The News Grit, 22/10/2024

Comments

Popular posts from this blog

प्रोजेक्ट आरोहण: NHAI की नई योजना, लेकिन किसके लिए?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( NHAI) ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल करते हुए टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और करियर निर्माण के लिए ‘प्रोजेक्ट आरोहण’ की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ एनएचएआई के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार यादव ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में किया। इस अवसर पर वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक एवं संयुक्त सीईओ डॉ. जफर खान और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिक्षा तक समान पहुँच देने का प्रयास एनएचएआई ने वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के साथ मिलकर यह योजना शुरू की है , जिसका मकसद टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को दूर करना , सामाजिक-आर्थिक भेदों को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों , जिनमें निम्न-आय वाले परिवारों की लड़कियाँ , पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी तथा अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र शामिल हैं , के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच प्रदान करना है। एनएचएआई का मानना है कि शिक्षा ही वह साध...

बढ़ते एशिया को रोकने में कोरियाई उपमहाद्वीप की उथल पुथल के भरोसे अमरीकी थिंकटैंक!!

आधुनिक वित्तीय और आर्थिक प्रणाली औपनिवेशिक यूरोप और नवऔपनिवेशिक अमरीकी आधिपत्य की देन है। किंतु 21 वीं सदी आते-आते एशिया की नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं चीन , भारत , जापान , कोरिया , वियतनाम , इंडोनेशिया आदि ने यह साबित कर दिया कि यह सदी एशिया की है। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एशिया में बढ़ते प्रभाव और असंतुलन को देखते हुए लगातार तनावपूर्ण बयानबाज़ी कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से उनकी हालिया मुलाक़ात इसी पृष्ठभूमि में बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। शांति की पहल और ट्रम्प टॉवर का सपना व्हाइट हाउस में हुई मुलाक़ात के दौरान दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन से संवाद स्थापित करने की इच्छा जताई। ली ने कहा कि यदि विभाजित कोरिया में शांति स्थापित हो जाती है तो यह ऐतिहासिक होगा। उन्होंने व्यंग्य और संकेत दोनों में जोड़ा कि “आप (ट्रम्प) उत्तर कोरिया में ट्रम्प टॉवर बना सकते हैं , जहाँ मैं आकर गोल्फ़ खेलूँगा।” ट्रम्प ने भी पुरानी मित्रता याद दिलाई और कहा कि वे किम जोंग उन से पहले ही तीन बार मिल चुके हैं और भविष्य में दोबारा मिलन...

भोपाल बनेगा देश का स्पोर्ट्स साइंस और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग हब!!

खेल के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल करने और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देने की दिशा में मध्यप्रदेश एक बड़ा कदम उठा रहा है। खेल विभाग द्वारा नाथु बरखेड़ा स्थित स्पोर्ट्स सिटी में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एवं हाई-परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह सेंटर उन सभी आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी सुविधाओं से लैस होगा , जिनकी आज के समय में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को निखारने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में जरूरत होती है। इसमें खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता , मानसिक दृढ़ता , चोटों से बचाव , और कुल प्रदर्शन सुधार पर व्यापक रूप से काम किया जाएगा। क्यों जरूरी है स्पोर्ट्स साइंस सेंटर ? आज का खेल जगत बेहद तेज और चुनौतीपूर्ण हो गया है। सिर्फ प्रतिभा या अच्छी कोचिंग अब पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई खिलाड़ी , चाहे वे कितने ही प्रतिभाशाली हों , मनोवैज्ञानिक दबाव , तकनीकी कमी या चोटों की वजह से अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते। अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में सफलता के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकन...