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इंदौर में पहली बार टैंडम पैराग्लाइडिंग फेस्टिवल, आसमान में उड़ान का रोमांच!!

रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय, परसवाड़ा (जिला बालाघाट) में इको क्लब के अंतर्गत दो दिवसीय ट्राइबल आर्ट पेंटिंग कार्यशाला का सफल आयोजन!!

रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय , परसवाड़ा (जिला बालाघाट) में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम एवं मिशन लाइफ के अंतर्गत इको क्लब द्वारा ट्राइबल आर्ट पेंटिंग की दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन दिनांक 12 एवं 13 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक किया गया। इस कार्यशाला में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित श्री मनोज गड़पाल (बिंदु शैली आर्ट्स) एवं श्री संजय पंचेश्वर (गोंड पेंटिंग आर्ट) ने प्रतिभागियों को अपने कला-ज्ञान एवं अनुभव से मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यशाला की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एल. एल. घोरमारे द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य महोदय ने ट्राइबल आर्ट की ऐतिहासिक , सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम में आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. ए. के. वैद्य ने इको क्लब के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला के महत्व एवं उसके शैक्षणिक लाभों को रेखांकित किया। वहीं इको क्लब प्रभारी डॉ. जयश्री सूर्यवंशी ने युवाओं में पर्यावरण संरक्षण एवं जनजातीय कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर बल देते हुए सभी मंचासीन अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन ड...

हरित भविष्य की ओर प्लास्टिक प्रदूषण पर विराम लगाने का संकल्प!!!!

" प्रकृति की रक्षा ही हमारी सुरक्षा है" – इसी भाव के साथ हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल हमें पर्यावरण संरक्षण की अहमियत बताता है , बल्कि यह चेतावनी भी देता है कि अब और देरी नहीं की जा सकती। 2025 का विश्व पर्यावरण दिवस “ प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना” विषय पर केंद्रित है , जो आज के समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक बन चुकी है। प्लास्टिक: सुविधा से विनाश तक आज हमारा जीवन प्लास्टिक पर बहुत अधिक निर्भर हो गया है। पानी की बोतल , खाने के डिब्बे , किचन में उपयोग होने वाले थैले , बच्चों के खिलौने , चिकित्सा उपकरण – हर जगह प्लास्टिक ने अपनी जगह बना ली है। यह सस्ता , टिकाऊ और आसानी से उपलब्ध होता है , लेकिन इसका विनाशकारी पक्ष हम नजरअंदाज कर रहे हैं। डॉ. (सुश्री) शरद सिंह के अनुसार , " हम प्लास्टिक और उसके कचरे से घिरे हुए हैं। एक छोटी-सी सुविधा हमारी ज़िंदगी का गला घोंट रही है।" उनके इस कथन से यह स्पष्ट होता है कि प्लास्टिक सुविधा नहीं , एक धीमा ज़हर बनता जा रहा है। क्या आप जानते हैं कि हर साल इतना प्लास्टिक कचरा फैलाया जा रह...