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इंदौर में पहली बार टैंडम पैराग्लाइडिंग फेस्टिवल, आसमान में उड़ान का रोमांच!!

समुद्र से संस्कृति तक: विश्व पुस्तक मेला 2026 में भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक प्रस्तुति!!

नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेला 2026 में भारतीय नौसेना की सशक्त उपस्थिति ने देश की गौरवशाली समुद्री परंपरा और नौसैनिक इतिहास को एक नई पहचान दी है। साहित्य , ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के इस प्रतिष्ठित आयोजन में भारतीय नौसेना की भागीदारी भारत की समुद्री विरासत के संरक्षण , संवर्धन और प्रचार के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ( NBT) द्वारा आयोजित इस 9 दिवसीय मेगा पुस्तक मेले का उद्घाटन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। देश-विदेश के प्रकाशकों , लेखकों और पाठकों को एक मंच पर लाने वाला यह मेला ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नौसेना इतिहास प्रभाग के नेतृत्व में विशेष प्रस्तुति भारतीय नौसेना के प्रमुख अनुसंधान संस्थान नौसेना इतिहास प्रभाग इस पहल का नेतृत्व कर रहा है। एनएचडी ने एनबीटी के सहयोग से भारतीय नौसेना के लिए विशेष स्टॉल स्थापित किए हैं , जहां नौसेना के प्रामाणिक प्रकाशनों के साथ-साथ बारीकी से तैयार किए गए युद्धपोतों और अन्य जहाजों के मॉडल...

भारतीय नौसेना में शामिल होगा ‘इक्षक’: स्वदेशी हाइड्रोग्राफिक उत्कृष्टता का नया अध्याय!!

भारतीय नौसेना अपनी जल सर्वेक्षण क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने जा रही है। 6 नवंबर , 2025 को कोच्चि के नौसेना बेस में एक भव्य समारोह के दौरान भारतीय नौसेना ‘एसवीएल इक्षक’ को औपचारिक रूप से अपनी सेवा में शामिल करेगी। यह समारोह भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक क्षण होगा , जिसमें नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे और पोत को कमीशन करेंगे।  ‘ इक्षक’: स्वदेशी तकनीकी क्षमता का परिचायक इक्षक , सर्वेक्षण पोत (वृहद) [एस.वी.एल.] श्रेणी का तीसरा पोत है और यह दक्षिणी नौसेना कमान में शामिल होने वाला पहला जहाज होगा। इस पोत का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ( GRSE) लिमिटेड ने किया है। यह पोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता , तकनीकी आत्मनिर्भरता और "आत्मनिर्भर भारत" अभियान की सफलता का शानदार उदाहरण है। इक्षक के निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी उपकरणों और सामग्रियों का उपयोग किया गया है। यह न केवल भारत की बढ़ती नौसैनिक तकनीकी दक्षता को प्रदर्शित करता है , बल्कि GRSE और देश के MSME क्षेत्र के बीच सशक्त होते औद्यो...

स्वदेशी तकनीक से बना INS निस्तार भारतीय नौसेना में शामिल, पनडुब्बी बचाव में माहिर!!

भारतीय नौसेना ने समुद्र की गहराइयों में राहत और बचाव अभियानों को नई धार देने वाला एक और स्वदेशी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की उपस्थिति में विशाखापत्तनम में पहली बार पूरी तरह भारतीय डिजाइन पर आधारित डाइविंग सपोर्ट वेसल ( INS Nistar) को नौसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। यह एक ऐतिहासिक क्षण है जो न केवल भारतीय नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाता है , बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। समुद्र की गहराइयों के लिए बना ‘निस्तार’ आईएनएस निस्तार को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया है और यह दो डाइविंग सपोर्ट वेसलों में से पहला है। यह पोत विशेष रूप से गहरे समुद्र में संतृप्ति डाइविंग (Saturation Diving) और पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए तैयार किया गया है। दुनिया की केवल कुछ ही नौसेनाओं के पास इस तरह की उच्च तकनीकी क्षमता है , जो भारतीय नौसेना को एक नई ऊँचाई पर स्थापित करता है। आईएनएस निस्तार की प्रमुख विशेषताएं आईएनएस निस्तार भारतीय नौसेना का एक अत्याधुनिक डाइविंग सपोर्ट वेसल है , जिसकी कुल लंबाई 118 मीटर है और यह ...

भारतीय नौसेना के चौथे सहायक पोत के निर्माण की शुरुआत: हिंदुस्तान शिपयार्ड में हुआ इस्पात कटाई समारोह!!

विशाखापत्तनम , 19 जून 2025 - भारतीय नौसेना की क्षमता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए , नौसैनिक बेड़े के लिए पाँच सहायक जहाजों ( Fleet Support Ships - FSS) में से चौथे पोत के निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। इस अवसर पर विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ( HSL) में “ इस्पात कटाई समारोह” का आयोजन किया गया , जिसमें नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री शक्ति में बढ़ोतरी यह परियोजना भारतीय नौसेना की " ब्लू वॉटर नेवी" बनने की महत्वाकांक्षा को बल देने वाली है। इन सहायक जहाजों की सहायता से समुद्र में लंबे समय तक तैनात नौसेना पोतों को बिना किसी बंदरगाह पर लौटे आवश्यक संसाधन जैसे ईंधन , पानी , गोला-बारूद और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचाई जा सकेगी। इससे भारतीय नौसेना की रणनीतिक पहुँच , गतिशीलता और समुद्री संचालन की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। इन जहाजों का कुल विस्थापन 40,000 टन से अधिक होगा , जिससे यह भारत द्वारा बनाए गए सबसे बड़े सहायक पोतों में गिने जाएंगे। ...

सागर की शान बनी इशिता शर्मा – अपने सपने को हकीकत में बदलने वाली बेटी!!!!

बेटियां अभिशाप नहीं , वरदान होती हैं। वे दो कुलों को आगे बढ़ाने वाली शक्ति होती हैं। अगर उन्हें सही दिशा , साथ और समर्थन मिले , तो वे हर वो सपना साकार कर सकती हैं , जिसे समाज कभी असंभव समझता था। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है मध्य प्रदेश के सागर की बहादुर बेटी इशिता शर्मा की , जिन्होंने अपने मजबूत इरादों और कठिन मेहनत के बल पर भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट का गौरव हासिल किया है। जब सपना बना संकल्प और संकल्प बना उपलब्धि इशिता का बचपन सेना के अनुशासित माहौल में बीता। उनके पिता दीपक शर्मा , जो मिलेट्री इंजीनियरिंग सर्विस में अधिकारी हैं , ने परिवार में देशसेवा की भावना को पनपने दिया। इशिता ने इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन में बीटेक करने के बाद टीसीएस जैसी प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी में मुंबई में नौकरी की , लेकिन मन हमेशा वर्दी और देश सेवा के प्रति ही आकर्षित रहा। यही जज्बा उन्हें वापस एसएसबी की ओर खींच लाया। दादा-दादी की छांव में मिली शिक्षा की नींव इशिता के पिता की नौकरी की प्रकृति के कारण लगातार स्थानांतरण होते रहे , ऐसे में इशिता की स्कूली शिक्षा की ज़िम्मेदारी निभाई दादा आर....