Skip to main content

Posts

Showing posts with the label WildlifeConservation

इंदौर में पहली बार टैंडम पैराग्लाइडिंग फेस्टिवल, आसमान में उड़ान का रोमांच!!

दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज, दक्षिण सागर में एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस संपन्न!!

सागर। वनमंडल दक्षिण सागर में पहली बार एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस 2026 का आयोजन 03 एवं 04 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक किया गया। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण कार्यक्रम है , जिसके अंतर्गत झीलों , तालाबों , नदियों और अन्य जल स्रोतों में पाए जाने वाले जलीय पक्षियों की गणना की जाती है। एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस का मुख्य उद्देश्य जलीय पक्षियों की संख्या , प्रजातीय विविधता तथा जल स्थलों की पारिस्थितिक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करना है , ताकि जलीय पक्षियों के संरक्षण , प्रबंधन और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए ठोस आधार तैयार किया जा सके। 09 तालाबों में हुआ सर्वेक्षण एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस 2026 के अंतर्गत वनमंडल दक्षिण सागर क्षेत्र के कुल 09 तालाबों का सर्वेक्षण किया गया। इस कार्य के लिए 04 सर्वेक्षण दलों का गठन किया गया , जिनमें वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। सर्वेक्षण के दौरान दलों द्वारा जलाशयों के किनारों तक पहुँचकर जलीय पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों , उनकी संख्या , गतिविधियों तथा उनके प्राकृतिक आवास की स्थिति का बारीकी से अव...

घास के मैदानों से मजबूत होता नौरादेही का वन्यजीव संरक्षण!!!!

मध्य प्रदेश में स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व न केवल राज्य का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है , बल्कि यह जैव विविधता , पारिस्थितिकी और वन्यजीवन संरक्षण की दिशा में एक नया उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है। यहां विस्थापन के बाद खाली हुए गांवों की जमीन पर विकसित किए गए घास के मैदानों ने न सिर्फ परिदृश्य को बदला है , बल्कि वन्य प्रजातियों के लिए एक अनुकूल आवास भी उपलब्ध कराया है। खास तौर पर शाकाहारी जानवरों की संख्या में जो तीव्र वृद्धि हुई है , उसने इस क्षेत्र को वन्यजीव पर्यटन और बाघों के संरक्षण दोनों ही दृष्टियों से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। विस्थापन से अवसर तक वर्ष 2010 में अफ्रीकी चीतों को भारत में बसाने के लिए नौरादेही क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया था। इस पहल के तहत 2014 में गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके परिणामस्वरूप कई गांवों को हटाकर उनकी जमीन को पुनः प्राकृतिक आवास में परिवर्तित किया गया। भले ही नौरादेही को आधिकारिक रूप से 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला , लेकिन उससे पूर्व ही संरक्षण कार्य प्रारंभ हो चुके थे। सागर और नरसिंहपुर जि...