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टीकमगढ़ के जैविक बाजार में मशरूम और मशरूम से बनें उत्पाद बना आकर्षण का केंद्र!!


टीकमगढ़, मध्य प्रदेश का खूबसूरत जिला, न केवल अपनी सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि हाल ही में यह जिला एक विशेष आयोजन के कारण चर्चा में है – "जैविक बाजार"। यह आयोजन टीकमगढ़ के कलेक्टर की पहल पर किया गया, जिसमें ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला और शहरवासियों को शुद्ध, स्वास्थ्यवर्धक और जैविक उत्पादों तक पहुंचने का अवसर। इस अनोखी पहल ने जिले के लोगों को जैविक उत्पादों के महत्व से परिचित कराने के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी समुदायों के बीच मजबूत कड़ी भी स्थापित की।

ग्रामीण हुनर का अद्भुत प्रदर्शन

टीकमगढ़ और आसपास के गांवों के स्थानीय किसानों और उद्यमियों ने इस जैविक बाजार में भाग लिया और अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। इन उत्पादों की खासियत यह थी कि ये पूरी तरह जैविक और घर पर तैयार किए गए थे। यह बाजार न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का माध्यम बना, बल्कि यह भी साबित किया कि ग्रामीण भारत के पास कितनी विविधता और गुणवत्ता है। आइए जानते हैं इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण:

  1. मशरूम: इस जैविक बाजार में स्थानीय किसानों द्वारा उगाए गए ताजे और जैविक मशरूम ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। मशरूम न केवल पोषण से भरपूर होते हैं, बल्कि इन्हें उगाने में रसायनों का प्रयोग भी नहीं किया गया था। मशरूम के उपयोग और इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए किसानों ने विशेष जानकारी भी साझा की।
  2. पापड़: घरेलू महिलाओं द्वारा तैयार किए गए कुरकुरे और स्वादिष्ट पापड़ इस बाजार का मुख्य आकर्षण रहे। इन पापड़ों को पूरी तरह प्राकृतिक मसालों और पारंपरिक विधियों से तैयार किया गया था, जिसने इन्हें और भी खास बना दिया। इन पापड़ों की गुणवत्ता और स्वाद ने ग्राहकों को खूब लुभाया।
  3. अचार: जैविक मसालों से तैयार विभिन्न प्रकार के अचार, जैसे नींबू, आम, और मिर्ची, इस बाजार में उपलब्ध थे। इन अचारों की सुगंध और स्वाद ने ग्राहकों को अपनी ओर खींचा। अचार बनाने वाली महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से इन्हें तैयार किया था, जिससे इनकी शुद्धता और गुणवत्ता बरकरार रही।
  4. अन्य जैविक उत्पाद: शहद, गुड़, जैविक अनाज, मसाले और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद भी इस बाजार का हिस्सा थे। इन उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता ने सभी को प्रभावित किया। खासकर शहद और गुड़ की मांग बहुत अधिक रही, क्योंकि इन्हें बिना किसी मिलावट के तैयार किया गया था।

आयोजन का उद्देश्य

टीकमगढ़ के कलेक्टर ने इस जैविक बाजार को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण उत्पादकों और शहरी खरीदारों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना बताया। इस पहल से न केवल किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिला, बल्कि ग्राहकों को भी शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद आसानी से उपलब्ध हुए। यह बाजार “लोकल के लिए वोकल” के विचार को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ।


लोकल कला और संस्कृति का संगम

जैविक बाजार केवल उत्पादों तक सीमित नहीं रहा। इस आयोजन में टीकमगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रस्तुत किया गया। स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। लोकगीत, नृत्य, और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया।

यह सांस्कृतिक संगम न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि इससे स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का मौका भी मिला। हस्तशिल्प के स्टॉल्स पर पारंपरिक और आधुनिक डिज़ाइनों का अनोखा संगम देखने को मिला, जिसने शहरी ग्राहकों को बहुत आकर्षित किया।

जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग

आज के समय में जब लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं, ऐसे में जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। रसायनमुक्त और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह जैविक बाजार आयोजित किया गया। इस आयोजन ने यह साबित किया कि ग्रामीण भारत के पास न केवल प्राकृतिक संसाधन हैं, बल्कि इन संसाधनों का उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने की क्षमता भी है।

टीकमगढ़ का यह जैविक बाजार ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक साबित हुआ। किसानों और स्थानीय उत्पादकों ने अपनी मेहनत से तैयार किए गए उत्पादों को उचित मूल्य पर बेचने का अवसर पाया, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

जैविक बाजार का एक और महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण संरक्षण है। रसायनयुक्त खेती और उत्पादों के उपयोग से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। जैविक उत्पादों का उपयोग इन समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकता है।

इस आयोजन ने लोगों को जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया। बाजार में आए लोगों को बताया गया कि जैविक उत्पाद न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, बल्कि वे पर्यावरण को भी सुरक्षित रखते हैं।

भविष्य की योजनाएं

टीकमगढ़ के निवासियों ने इस जैविक बाजार को खुले दिल से अपनाया और बड़ी संख्या में इसमें हिस्सा लिया। यह आयोजन इतनी सफलता प्राप्त कर चुका है कि अब भविष्य में ऐसे और भी आयोजनों की योजना बनाई जा रही है। कलेक्टर टीकमगढ़ ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल ग्रामीण उत्पादकों को प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि शहरी और ग्रामीण समुदायों के बीच मजबूत संबंध भी स्थापित करेंगे।

टीकमगढ़ का जैविक बाजार एक शानदार पहल है जो “लोकल के लिए वोकल” के विचार को बढ़ावा देती है। यह आयोजन न केवल ग्रामीण उत्पादकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, बल्कि समाज को स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का एक सफल प्रयास भी है।

यह जैविक बाजार टीकमगढ़ के ग्रामीण और शहरी समाज के बीच एक ऐसा पुल बना रहा है, जो न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी योगदान देगा।

तो, अगली बार जब भी आपको शुद्ध और जैविक उत्पाद चाहिए हों, टीकमगढ़ के इस जैविक बाजार का हिस्सा जरूर बनें। यहां न केवल आपको स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद मिलेंगे, बल्कि गांव की मिट्टी की खुशबू और लोककला का अनुभव भी होगा। यह बाजार एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो दिखाता है कि कैसे स्थानीय पहल से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

- The News Grit, 12/01/2025


 

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