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अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

खाते में दिखी गड़बड़ी… और खुल गया करोड़ों का खेल!!

बैतूल  जिला पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए ₹9 करोड़ 84 लाख 95 हजार 212 की हेराफेरी का खुलासा किया है। इस संगठित गिरोह ने एक ही बैंक के 7 खाताधारकों के खातों को निशाना बनाया था, जिनमें से एक मृत व्यक्ति का बैंक खाता भी शामिल था। पुलिस ने इंदौर में दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

मजदूर के जन-धन खाते में मिली करोड़ों की गतिविधि

खेड़ी सावलीगढ़ निवासी मजदूर बिसराम इवने जब अपने जन-धन खाते की KYC अपडेट कराने बैंक पहुंचे, तो उन्होंने खाते में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन देखे। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दर्ज कराई। SP वीरेंद्र जैन और ASP कमला जोशी के निर्देशन में साइबर सेल और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम को जांच सौंपी गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जून 2025 से अब तक बिसराम के खाते से लगभग ₹1.50 करोड़ का अवैध लेन-देन हुआ था।

दूध का दूध, पानी का पानी पुलिस जांच में उजागर हुई संगठित साइबर लूट

गहन तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की ट्रैकिंग, डिजिटल फॉरेंसिक और लगातार मॉनिटरिंग के बाद पुलिस के सामने यह सच सामने आया कि साइबर गिरोह ने एक ही बैंक शाखा के सात खाताधारकों से कुल ₹9.84 करोड़ की संगठित हेराफेरी की थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गिरोह ने मृत व्यक्ति राजेश बर्डे के खाते का भी शातिर तरीके से दुरुपयोग किया। बैंक रिकॉर्ड में बदलाव करते हुए उन्होंने:

·         मोबाइल नंबर बदल दिया,

·         नया एटीएम कार्ड जारी करा लिया,

·         इंटरनेट बैंकिंग एक्टिव कर ली,

·         और अंततः ओटीपी सिस्टम पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया।

इस जालसाजी के जरिए वे बिना किसी बाधा के खाते से करोड़ों रुपये निकालने में सफल हो गए।

बैंक के अस्थायी कर्मचारी की मिलीभगत साबित

जांच में पता चला कि यह पूरा फर्जीवाड़ा बैंक के एक अस्थायी कर्मचारी की मिलीभगत से चल रहा था, जो खातों की गोपनीय जानकारी, दस्तावेजों में बदलाव, ATM/पासबुक जारी कराने और खाता अपडेट करने में गिरोह की मदद करता था। उसकी सहायता से आरोपी खातों तक पहुंच बनाने और करोड़ों की हेराफेरी करने में सफल हुए।

इंदौर में दबिश, तीन गिरफ़्तार भारी मात्रा में डिजिटल सबूत जब्त

तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने इंदौर के दो ठिकानों पर दबिश देकर राजा उर्फ आयुष चौहान, अंकित राजपूत और नरेंद्र सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया। दबिश के दौरान पुलिस को गिरोह के साइबर नेटवर्क से जुड़े बड़ी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय सबूत मिले। जब्त की गई सामग्री में शामिल हैं, 15 मोबाइल फोन (25 सिम सहित), 21 एटीएम कार्ड, ₹28,000 नकद (काले बैग में), 11 बैंक पासबुक, 7 चेकबुक, 2 पीओएस मशीनें, 69 एटीएम जमा रसीदें (जिनमें कुल ₹21 लाख जमा दिखाया गया है), ₹48,000 की जमा पर्ची, 2 लैपटॉप, 1 राउटर तथा 4 रजिस्टर/डायरी समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज।

पुलिस द्वारा हाल ही में जब्त किए गए डिजिटल सबूतों से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधी बेहद संगठित नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। ऐसे मामलों से सबक लेते हुए हर नागरिक के लिए सतर्क और जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि आपकी सुरक्षा काफी हद तक आपके अपने सावधानीपूर्ण व्यवहार पर निर्भर करती है। किसी भी अनजान लिंक या कॉल पर भरोसा न करें, बैंक विवरण, OTP, पासवर्ड और ATM से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें, तथा किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी मिलते ही तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें ये सभी उपाय आपको साइबर ठगी से बचाने में सहायक होंगे।

The News Grit, 22/11/2025

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