सड़क दुर्घटना के दौरान हर पल बेहद कीमती होता है , खासकर वह पहला एक घंटा जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। इसी अवधि में यदि घायल को समय पर इलाज मिल जाए , तो उसकी जान बचाई जा सकती है या आजीवन विकलांगता से बचाव संभव होता है। ऐसे में दुर्घटना स्थल पर मौजूद आम नागरिक की भूमिका निर्णायक हो जाती है। इसी मानवीय हस्तक्षेप को प्रोत्साहित और संरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘राह-वीर’ (नेक आदमी) नीति को प्रभावी रूप से लागू किया है। गुड समैरिटन नियम: डर से आज़ादी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम , 2019 की धारा 134 ए के तहत वर्ष 2020 में गुड समैरिटन रूल्स अधिसूचित किए। इन नियमों का मूल उद्देश्य स्पष्ट है , जो व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित की मदद करता है , उसे किसी भी प्रकार के कानूनी , प्रशासनिक या सामाजिक भय का सामना न करना पड़े। दुर्घटना में घायल किसी अजनबी को उठाकर अस्पताल पहुंचाने वाला व्यक्ति , चाहे वह उसका नाम भी न जानता हो , ‘ राह-वीर’ कहलाता है। कानून ऐसे नेक आदमी की गरिमा , निजता और स्वतंत्रता की पूरी तरह रक्षा करता है। क्या है ‘गोल्डन...
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