मुंबई में आयोजित 8वें वैश्विक फिल्म पर्यटन सम्मेलन में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि फिल्म पर्यटन अब भारत की गंतव्य ब्रांडिंग और आर्थिक विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है। सम्मेलन का आयोजन PHD Chamber of Commerce and Industry (पीएचडीसीसीआई) द्वारा किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, फिल्म उद्योग, स्टूडियो प्रमुखों, कंटेंट निर्माताओं और पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सिनेमाई कहानी कहने की कला को मापने योग्य पर्यटन वृद्धि में बदलने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करना रहा।
स्क्रीन
से गंतव्य तक: कहानी से यात्रा की प्रेरणा
विशेष वीडियो
संदेश में केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री Suresh Gopi ने कहा कि फिल्मों में दिखाया गया स्थान केवल भूगोल नहीं रहता, बल्कि वह आकांक्षा, स्मृति और अनुभव का सपना बन जाता
है। उन्होंने भारत को “कहानियों की सभ्यता” बताते हुए वाराणसी, राजस्थान, पूर्वोत्तर और केरल जैसे क्षेत्रों की
सिनेमाई क्षमता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा
कि सरकार नीतिगत सुधारों और आसान अनुमोदन प्रक्रियाओं के माध्यम से भारत को एक
फिल्म-अनुकूल गंतव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार फिल्म पर्यटन आजीविका,
सॉफ्ट पावर और स्थानीय आर्थिक अवसरों को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम
बन सकता है।
रणनीतिक
डिजाइन जरूरी, संयोग नहीं
पर्यटन
मंत्रालय के अपर सचिव और महानिदेशक सुमन बिल्ला ने कहा कि फिल्म पर्यटन को
योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना होगा। उन्होंने बताया कि वैश्विक शोध के अनुसार
सिनेमा और मीडिया से हर साल लगभग 8
करोड़ यात्री प्रभावित होते हैं।
उन्होंने
फिल्म पर्यटन को सबसे लागत-कुशल और उच्च प्रभाव वाले गंतव्य विपणन साधनों में से
एक बताया। साथ ही मॉडल दिशानिर्देश, मापनीय
प्रोत्साहन, PPP व्यवस्था, डेटा-आधारित
मूल्यांकन और राजस्व ट्रैकिंग तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
राज्यों
की सक्रिय भागीदारी
सम्मेलन को Telangana
Tourism और Meghalaya Tourism का समर्थन
प्राप्त था। तेलंगाना सरकार के विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने राज्य के एकीकृत
फिल्म निर्माण इकोसिस्टम को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि हैदराबाद आज
विश्वस्तरीय पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाएँ प्रदान कर रहा है और विभिन्न भाषाओं के
फिल्म उद्योगों की जरूरतें पूरी कर रहा है। उन्होंने “Film in Telangana” डिजिटल पोर्टल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंच अनुमतियों को सरल बनाता
है और शूटिंग से जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्व पहचान कर प्रक्रिया को तेज करता है।
वैश्विक
मॉडल से सीखने की जरूरत
पीएचडीसीसीआई
के सीईओ डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि सिनेमा भारत का सबसे कम उपयोग किया गया पर्यटन
अभियान है। उन्होंने न्यूजीलैंड और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के फिल्म-पर्यटन
मॉडल का उदाहरण देते हुए एक समन्वित राष्ट्रीय ढांचे और राज्यों के प्रोत्साहनों
के तालमेल की आवश्यकता बताई।
Motion Picture
Association (इंडिया) के प्रबंध निदेशक उदय सिंह ने कहा कि वैश्विक
स्क्रीन उद्योग लगभग 26 लाख नौकरियों का समर्थन करता है और
भारत तेजी से निर्माण तथा पोस्ट-प्रोडक्शन हब के रूप में उभर रहा है। भारत पहले ही
120 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रोडक्शन आकर्षित कर चुका है।
ओटीटी
और डिजिटल कंटेंट से नए गंतव्य उभर रहे
सम्मेलन में
इस बात पर भी जोर दिया गया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म और सीमा-रहित डिजिटल कंटेंट उपभोग
के दौर में नए पर्यटन स्थलों की खोज तेजी से बढ़ रही है। विषयगत सत्रों में तेलुगु
फिल्म उद्योग की भूमिका, ओटीटी-प्रेरित कंटेंट
से नए गंतव्यों का उभार और सिनेमा के जरिए उत्तर-पूर्व भारत के प्रचार पर चर्चा
हुई।
व्यापक
उद्योग समर्थन
सम्मेलन को
कई प्रमुख संगठनों का सहयोग मिला, जिनमें Hilton,
IRCTC, FHRAI, IATO और TAAI शामिल रहे। समापन
सत्र में “कहानियाँ, जो लोगों को यात्रा करने पर मजबूर करती
हैं” विषय पर संवाद आयोजित हुआ, जिसमें फिल्म निर्माताओं और
कलाकारों ने साझा किया कि किस प्रकार भावनात्मक सिनेमाई अनुभव दर्शकों को वास्तविक
स्थलों तक यात्रा के लिए प्रेरित करते हैं।
सम्मेलन का
निष्कर्ष स्पष्ट रहा- यदि नीति, प्रोत्साहन और रचनात्मक उद्योग साथ मिलकर काम करें, तो
फिल्म पर्यटन भारत की वैश्विक छवि और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को नई ऊंचाई दे
सकता है।
The News Grit, 14/02/2026


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