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पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक, रामसिंह कुशवाह बने किसानों के लिए मिसाल!!

पोंडुरु खादी को GI टैग, पारंपरिक कारीगरों को संरक्षण और वैश्विक पहचान की नई राह!!

आंध्र प्रदेश की सुप्रसिद्ध पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेतक ( GI टैग) का दर्जा प्रदान किया गया है। यह पंजीकरण भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा भारत सरकार के सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग के पक्ष में किया गया है। GI टैग मिलने से इस दुर्लभ हस्तनिर्मित खादी उत्पाद को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा और इसकी विशिष्ट पहचान व प्रामाणिकता सुरक्षित रह सकेगी। शुक्रवार को मीडिया के लिए जारी एक बयान में केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने पोंडुरु खादी को GI टैग प्रदान किए जाने पर गहरा संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केवीआईसी देश के पारंपरिक खादी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और यह उपलब्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खादी क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि पोंडुरु खादी को GI टैग मिलना पूरे खादी क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह न केवल इस विशिष्ट हस्तकारी वस्त्र की प्रामाणिकता की रक्षा करता है , बल्कि उन कारीगरों के योगदान को भी सम्मान देता है , जो पीढ़ियों से इस पारंप...