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पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक, रामसिंह कुशवाह बने किसानों के लिए मिसाल!!

कूनो में बढ़ता चीतों का कुनबा, जैव विविधता को मिल रही नई ताकत!!

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों के आगमन के साथ भारत की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्बसाहट परियोजना ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इसे भारत और बोत्सवाना के बीच जैव विविधता संरक्षण की ऐतिहासिक साझेदारी बताया। तीन चीतों को प्रतीकात्मक रूप से किया रिलीज केंद्रीय मंत्री ने शनिवार सुबह कूनो पहुंचकर बोत्सवाना से आए 9 चीतों में से तीन चीतों को क्वारंटीन के लिए बनाए गए विशेष बाड़ों में प्रतीकात्मक रूप से रिलीज किया। ये सभी चीते भारतीय वायुसेना के तीन हेलीकॉप्टरों के माध्यम से ग्वालियर एयरपोर्ट से कूनो नेशनल पार्क लाए गए। इन 9 चीतों में 6 मादा और 3 नर शामिल हैं। पार्क प्रशासन के अनुसार , सभी चीतों को स्वास्थ्य परीक्षण और अनुकूलन प्रक्रिया के तहत कुछ समय के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा , जिसके बाद उन्हें निर्धारित चरणबद्ध प्रक्रिया के अनुसार खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। 48 हुई कुल संख्या बोत्सवाना से आए इन 9 चीतों के बाद अब प्रदेश में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है। इनमें से 45 चीते कूनो नेशनल पार्क में हैं...

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बढ़ी बाघों की संख्या, कान्हा से आया नया मेहमान, मोहली रेंज में छोड़ा गया!!

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व से लाया गया तीन वर्षीय बाघ रविवार रात को नौरादेही टाइगर रिजर्व की मोहली रेंज में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। इस नए मेहमान की आमद से न केवल बाघों की संख्या में इजाफा होगा , बल्कि जीन विविधता बढ़ने से भविष्य में इनब्रीडिंग की संभावना भी कम होगी। पेंच से कान्हा , अब नौरादेही तक का सफर इस बाघ की कहानी संघर्ष और प्रशिक्षण से भरी रही है। अप्रैल 2023 में महज चार महीने की उम्र में यह शावक पेंच टाइगर रिजर्व में अपनी मां से बिछड़ गया था। इसके बाद उसे संरक्षण और प्रशिक्षण के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया। कान्हा में शावक को घोरेला बाड़े में रखकर शिकार करने और जंगल में स्वतंत्र रूप से रहने का प्रशिक्षण दिया गया। समय के साथ बाघ ने जंगल में अपनी सक्रियता बढ़ाई , अपना क्षेत्र विकसित किया और दो सफल शिकार भी किए। अब करीब तीन वर्ष की उम्र पूरी होने पर वन विभाग से अनुमति मिलने के बाद उसे नौरादेही टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित क...