दुर्लभ एवं प्रतिबंधित वन्यजीवों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स भोपाल ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और वनमंडल भोपाल के साथ संयुक्त ऑपरेशन में रेल नेटवर्क के जरिए संचालित एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान 313 जीवित दुर्लभ कछुए और 2 संरक्षित तोते बरामद किए गए।
ट्रेन
में पकड़ा गया मुख्य आरोपी
संयुक्त टीम
ने 3 फरवरी 2026 को ट्रेन संख्या 19322 पटना–इंदौर एक्सप्रेस में संत हिरदाराम स्टेशन पर छापामार कार्रवाई की।
प्रथम श्रेणी वातानुकूलित कोच में अटेंडेंट के रूप में कार्यरत आरोपी अजय सिंह
राजपूत (निवासी इंदौर) के कब्जे से 311 जीवित दुर्लभ एवं
प्रतिबंधित प्रजाति के कछुए जब्त किए गए। मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।
कई
शहरों में एक साथ छापे
प्रारंभिक
पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियों ने मध्यप्रदेश के कई
शहरों-नीमच, मंदसौर, रतलाम, इंदौर, देवास, उज्जैन, नागदा और शाजापुर-सहित उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक
साथ छापामार कार्रवाई की। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से रेल
मार्ग का उपयोग कर वन्यजीवों की तस्करी कर रहा था। गिरोह के सदस्य पालतू पशु
दुकानदार, डॉग ब्रीडर और रेल एसी कोच अटेंडेंट जैसी पहचान का
उपयोग कर रेल मार्ग से वन्यजीवों की तस्करी कर रहे थे।
चार
संरक्षित प्रजातियों के कछुए बरामद
कार्रवाई के
दौरान कुल 313 जीवित कछुए बरामद किए गए,
जो अनुसूची-1 में दर्ज चार संरक्षित
प्रजातियों से संबंधित हैं, जिनमें -
इंडियन टेंट टर्टल, इंडियन रूफ्ड टर्टल, क्राउनड रिवर टर्टल और स्टार टॉरटॉइस शामिल हैं। इसके अलावा 2 जीवित रोज-रिंग्ड पैराकीट (तोते) भी जब्त किए गए। टीम ने आरोपियों के पास
से एक मोटरसाइकिल और सात मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिन्हें
साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया है।
आरोपी
में एक नाबालिग भी शामिल
मामले में
अरविंद परिहार, परवेज खान, नवीन
उर्फ दीपह पारखे, करण मालवीय, आसिफ खान
और अजय सिंह राजपूत सहित एक नाबालिग आरोपी को पकड़ा गया है। सभी आरोपियों को भोपाल
स्थित न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। प्रकरण की विवेचना
जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
पारिस्थितिकी
के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं कछुए
वन
अधिकारियों के अनुसार कछुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं। वे नदियों
और जलाशयों को स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उनकी अवैध पकड़ और व्यापार से प्राकृतिक संतुलन पर गंभीर असर पड़ता है।
वन
विभाग की अपील और कानूनी प्रावधान
वन विभाग ने
आमजन से अपील की है कि दुर्लभ एवं प्रतिबंधित जलीय वन्यजीवों को पालना,
रखना, खरीदना या बेचना कानूनन अपराध है। ऐसे
मामलों में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत 7 वर्ष तक के
कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी
तुरंत संबंधित विभाग को दें।
The News Grit, 18/02/2026

Comments
Post a Comment