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पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक, रामसिंह कुशवाह बने किसानों के लिए मिसाल!!

पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक, रामसिंह कुशवाह बने किसानों के लिए मिसाल!!

भोपाल के फन्दा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बरखेड़ा बोंदर गांव में किसान रामसिंह कुशवाह ने पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी की ओर कदम बढ़ाकर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले कुशवाह आज फूलों और फलों की आधुनिक खेती से हर महीने लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता केवल आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों के सशक्तिकरण, नवाचार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग की मिसाल भी बन गई है।

पारंपरिक खेती से आगे बढ़ने की सोच

रामसिंह कुशवाह का परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था। खेतों में मुख्य रूप से धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलें उगाई जाती थीं। लेकिन बढ़ती लागत और अपेक्षाकृत कम लाभ के कारण खेती से मिलने वाली आय सीमित थी। इन परिस्थितियों में परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियाँ बनी रहती थीं और खेती को लाभकारी बनाने के नए विकल्पों की तलाश जारी थी।

योजना से मिली नई दिशा

इसी दौरान कुशवाह को उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना की जानकारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना के अंतर्गत इस योजना का लाभ उठाने का निर्णय लिया और आधुनिक बागवानी की शुरुआत की। सबसे पहले उन्होंने लगभग एक हजार वर्गफुट क्षेत्र में पॉलीहाउस स्थापित कर गुलाब और जरबेरा जैसे फूलों की खेती शुरू की। आधुनिक तकनीक और संरक्षित खेती के कारण उन्हें उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में बेहतर परिणाम मिलने लगे।

पॉलीहाउस में 30 हजार पौधों का रोपण

बागवानी के क्षेत्र में सफलता मिलने के बाद कुशवाह ने अपनी खेती का दायरा और बढ़ाया। वर्ष 2023–24 में राज्य योजना के तहत एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत उन्होंने एक एकड़ भूमि में पॉलीहाउस स्थापित किया, जिसमें सरकार से सब्सिडी भी प्राप्त हुई। इस पॉलीहाउस में उन्होंने गुलाब, जरबेरा और गेंदा के लगभग 30 हजार पौधे लगाए। इन पौधों से मिलने वाले उत्पादन ने उनकी आय में बड़ा परिवर्तन ला दिया। वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग 4 हजार कट फ्लावर बाजार में बेच रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 4 से 6 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।

सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम का उपयोग

उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उद्देश्य से कुशवाह ने इस वर्ष अपने पॉलीहाउस में सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम स्थापित कराया। इस सिस्टम की कुल लागत लगभग 4 लाख रुपये है, जिसमें से 2 लाख रुपये की सब्सिडी सरकार से प्राप्त हुई। इस आधुनिक ऑटोमेशन तकनीक के माध्यम से पानी, खाद और दवाइयों की संतुलित मात्रा लगातार स्वचालित रूप से पौधों तक पहुंचाई जाती है। इस प्रणाली में किसी भी प्रकार के मैन्युअल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती। परिणामस्वरूप पानी और उर्वरक की बचत होती है, समय की बचत होती है और खेती की लागत भी कम हो जाती है। इस आधुनिक तकनीक को अपनाकर कुशवाह पारंपरिक खेती से ऑटोमेशन आधारित बागवानी करने वाले भोपाल जिले के पहले किसान बन गए हैं।

देश के कई शहरों में हो रही फूलों की सप्लाई

कुशवाह के खेतों में उगाए गए गुलाब और जरबेरा की गुणवत्ता काफी अच्छी है। यही कारण है कि उनके फूलों की मांग स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रही। वर्तमान में उनके खेतों से लखनऊ, दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों तक फूलों की सप्लाई की जा रही है। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिल रही है और उनकी खेती का व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है।

आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाया

कुशवाह ने अपने खेतों में 30 हजार हाइब्रिड जरबेरा पौधों का रोपण किया है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली भी अपनाई है। इन आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को स्थापित करने में उन्हें 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिला। ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक के उपयोग से पानी की बचत के साथ-साथ पौधों को आवश्यक पोषक तत्व भी सही मात्रा में मिलते हैं। इससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

प्रतिदिन हजारों फूलों का उत्पादन

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप कुशवाह के खेतों में फूलों का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग 1500 से 2000 फूलों का उत्पादन कर बाजार में बेच रहे हैं। वहीं उन्हें करीब 4 हजार फूल स्पाइक प्रतिदिन प्राप्त होते हैं, जिससे उनकी दैनिक आय लगभग 4 से 5 हजार रुपये तक पहुँच जाती है। फूलों और फलों की आधुनिक खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना दिया है

किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण

रामसिंह कुशवाह की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है। यह साबित करती है कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले तो खेती को पारंपरिक जीविका से आगे बढ़ाकर एक लाभकारी और आधुनिक व्यवसाय में बदला जा सकता है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि नवाचार, तकनीक और योजनाओं के सही उपयोग से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं।

The News Grit, 07/03/2026

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