Skip to main content

अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

सागर। गवेषणा मानवोत्थान, पर्यावरण तथा स्वास्थ्य जागरूकता समिति द्वारा “अंधविश्वास बनाम तर्कशीलता : भारतीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजघाट रोड तिली स्थित एक होटल के सभागार में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और शहर के नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में तर्कशील समिति से जुड़े डॉ. बलविंदर बरनाला मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में समाज में प्रचलित अनेक अंधविश्वासों की चर्चा करते हुए तर्क, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुभवजन्य प्रमाणों के माध्यम से उन्हें चुनौती दी। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता और वैज्ञानिक सोच का विकास ही अंधविश्वासों को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका है। संवाद के दौरान उन्होंने उपस्थित श्रोताओं से प्रश्न आमंत्रित किए और उनके समाधान भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन डॉ. राजेश गौतम और डॉ. सुनील साहू ने किया।

संवाद के दूसरे सत्र में समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य, साहित्य, पशु कल्याण और आत्मनिर्भरता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान किया गया। इस अवसर पर गवेषणा समिति के अध्यक्ष डॉ. मनोहरलाल गोपीबाई चौरसिया ने कहा कि गवेषणा संस्था अपने आयोजनों में सम्मानित व्यक्तियों के साथ उनकी माताओं का भी सम्मानपूर्वक नामोल्लेख करती है, ताकि उस संस्कार और प्रेरणा को भी सम्मान मिले जिसने इन व्यक्तित्वों को गढ़ा है। उन्होंने महिलाओं के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस दिन महिलाएँ अपने श्रम और योगदान का वास्तविक हिसाब मांगेंगी, उस दिन मानव इतिहास की सबसे बड़ी धोखाधड़ी पकड़ी जाएगी।

कार्यक्रम में सम्मानित महिलाओं में प्रमुख रूप से प्रो. चंदा सुहाग रानी बेन शामिल रहीं, जो डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में प्रॉक्टर और हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में शिक्षण और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। डॉ. निलय सीमा को सस्टेनेबल पैकेजिंग के क्षेत्र में नवाचार के लिए सम्मानित किया गया, जिन्होंने कृषि अवशेष जैसे भूसा और पराली से प्लास्टिक डिस्पोजल का पर्यावरण अनुकूल विकल्प विकसित किया है।

इसी प्रकार डॉ. श्वेता मोहनी, जो सिद्धत्व फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष, योग और आहार विशेषज्ञ के रूप में वेलनेस प्रशिक्षण दे रही हैं, को भी सम्मानित किया गया। डॉ. रुचि को फिजियोथैरेपी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मान मिला। वे सुरुचि रिहैब एंड फिजियोथैरेपी सेंटर की संचालक हैं और न्यूरो फिजियोथैरेपी में गोल्ड मेडलिस्ट होने के साथ हजारों मरीजों और विशेष बच्चों के पुनर्वास में योगदान दे चुकी हैं

इसके अलावा गीता को केंद्रीय जेल सागर में 28 वर्षों से शिक्षक और मोटिवेटर के रूप में बंदियों के शिक्षा, पुनर्वास और कौशल विकास में उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. देवकी दीपा को साहित्य, शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मान दिया गया। वे संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा के बाद एक प्रतिष्ठित हिंदी लेखिका और शिक्षिका के रूप में स्थापित हुई हैं।

महिला स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान के लिए डॉ. रूबी रेजा को सम्मानित किया गया, जो स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में महिलाओं के स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार में सक्रिय हैं। पशु कल्याण के क्षेत्र में स्वाति जतना, जो यारा फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष हैं, को बेघर और घायल पशुओं के उपचार तथा संरक्षण के लिए सम्मान मिला। वहीं गुड्डी प्रेमरानी को आदिवासी समाज में आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण बनने के लिए सम्मानित किया गया, जिन्होंने घरेलू कार्यों से शुरुआत कर आज स्वयं की साड़ी दुकान स्थापित कर स्वावलंबन का मार्ग अपनाया है।

कार्यक्रम में सम्मानित सभी महिलाओं को मंच पर आमंत्रित कर उनकी जीवन यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों पर अपने विचार साझा करने का अवसर दिया गया। उनके अनुभवों और प्रेरक कथनों ने उपस्थित जनसमुदाय को गहराई से प्रभावित किया। आयोजन में गवेषणा परिवार की महिला सदस्यों शोभा देवकी बाई, डॉ. सरिता रामदुलारी, अरुणा सुशीला, विदुषा तथा नन्ही बिटिया इति-अरुणा ने सम्मानित महिलाओं को सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न और स्नेह उपहार भेंट किए।

कार्यक्रम की आयोजन टीम में डॉ. चंदन, डॉ. दिनेश, डॉ. तरुण, डॉ. शिवकुमार, कैलाश चौरसिया और पुरुषोत्तम चौरसिया की सक्रिय भूमिका रही। अंत में समिति के सचिव इंजी. रमेश चौरसिया ने मुख्य वक्ता डॉ. बलविंदर बरनाला को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों तथा आयोजन टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।

The News Grit, 16/03/2026

Comments

Popular posts from this blog

प्रोजेक्ट आरोहण: NHAI की नई योजना, लेकिन किसके लिए?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( NHAI) ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल करते हुए टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और करियर निर्माण के लिए ‘प्रोजेक्ट आरोहण’ की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ एनएचएआई के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार यादव ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में किया। इस अवसर पर वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक एवं संयुक्त सीईओ डॉ. जफर खान और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिक्षा तक समान पहुँच देने का प्रयास एनएचएआई ने वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के साथ मिलकर यह योजना शुरू की है , जिसका मकसद टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को दूर करना , सामाजिक-आर्थिक भेदों को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों , जिनमें निम्न-आय वाले परिवारों की लड़कियाँ , पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी तथा अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र शामिल हैं , के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच प्रदान करना है। एनएचएआई का मानना है कि शिक्षा ही वह साध...

अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाया, लाखों नौकरियों पर संकट!!

अमेरिका ने बुधवार से भारत से आने वाले अधिकांश आयातित उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा ( CBP) द्वारा जारी नोटिस के बाद प्रभावी हुआ , जिसमें कहा गया था कि यह आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 6 अगस्त 2025 के कार्यकारी आदेश 14329 के तहत लागू किया जा रहा है। इस आदेश का शीर्षक था – “रूसी संघ की सरकार द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए खतरों को संबोधित करना।” किन उत्पादों पर लागू और किन्हें छूट सीबीपी के अनुसार , यह शुल्क उन सभी भारतीय वस्तुओं पर लागू होगा जो अमेरिका में उपभोग के लिए आयातित की जाती हैं। हालांकि , लोहा , इस्पात , एल्युमीनियम , वाहन , तांबा और इनके कुछ व्युत्पन्न उत्पादों को इस अतिरिक्त ड्यूटी से बाहर रखा गया है। वहीं , अमेरिकी बाजार में भारत के करीब 30.2% निर्यात (लगभग 27.6 अरब डॉलर) को शुल्क मुक्त प्रवेश मिलता रहेगा। इसमें फार्मा ( 12.7 अरब डॉलर) , इलेक्ट्रॉनिक्स ( 8.18 अरब डॉलर) , रिफाइंड लाइट ऑयल और एविएशन टरबाइन फ्यूल ( 3.29 अरब डॉलर) , पुस्तकें और ब्रोशर ( 165.9 मिलियन डॉलर) तथा प्लास्टिक ( 155.1 मिलियन...

बढ़ते एशिया को रोकने में कोरियाई उपमहाद्वीप की उथल पुथल के भरोसे अमरीकी थिंकटैंक!!

आधुनिक वित्तीय और आर्थिक प्रणाली औपनिवेशिक यूरोप और नवऔपनिवेशिक अमरीकी आधिपत्य की देन है। किंतु 21 वीं सदी आते-आते एशिया की नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं चीन , भारत , जापान , कोरिया , वियतनाम , इंडोनेशिया आदि ने यह साबित कर दिया कि यह सदी एशिया की है। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एशिया में बढ़ते प्रभाव और असंतुलन को देखते हुए लगातार तनावपूर्ण बयानबाज़ी कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से उनकी हालिया मुलाक़ात इसी पृष्ठभूमि में बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। शांति की पहल और ट्रम्प टॉवर का सपना व्हाइट हाउस में हुई मुलाक़ात के दौरान दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन से संवाद स्थापित करने की इच्छा जताई। ली ने कहा कि यदि विभाजित कोरिया में शांति स्थापित हो जाती है तो यह ऐतिहासिक होगा। उन्होंने व्यंग्य और संकेत दोनों में जोड़ा कि “आप (ट्रम्प) उत्तर कोरिया में ट्रम्प टॉवर बना सकते हैं , जहाँ मैं आकर गोल्फ़ खेलूँगा।” ट्रम्प ने भी पुरानी मित्रता याद दिलाई और कहा कि वे किम जोंग उन से पहले ही तीन बार मिल चुके हैं और भविष्य में दोबारा मिलन...