मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों के आगमन के साथ भारत की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्बसाहट परियोजना ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इसे भारत और बोत्सवाना के बीच जैव विविधता संरक्षण की ऐतिहासिक साझेदारी बताया।
तीन
चीतों को प्रतीकात्मक रूप से किया रिलीज
केंद्रीय
मंत्री ने शनिवार सुबह कूनो पहुंचकर बोत्सवाना से आए 9 चीतों में से तीन चीतों को क्वारंटीन के लिए बनाए गए विशेष बाड़ों में
प्रतीकात्मक रूप से रिलीज किया। ये सभी चीते भारतीय वायुसेना के तीन हेलीकॉप्टरों
के माध्यम से ग्वालियर एयरपोर्ट से कूनो नेशनल पार्क लाए गए। इन 9 चीतों में 6 मादा और 3 नर
शामिल हैं। पार्क प्रशासन के अनुसार, सभी चीतों को स्वास्थ्य
परीक्षण और अनुकूलन प्रक्रिया के तहत कुछ समय के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा,
जिसके बाद उन्हें निर्धारित चरणबद्ध प्रक्रिया के अनुसार खुले जंगल
में छोड़ा जाएगा।
48
हुई कुल संख्या
बोत्सवाना से
आए इन 9 चीतों के बाद अब प्रदेश में चीतों की कुल संख्या 48
हो गई है। इनमें से 45 चीते कूनो नेशनल पार्क में हैं,
जबकि 3 चीते गांधी सागर अभयारण्य में रह रहे
हैं।
केंद्रीय
मंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल और प्रयासों से
शुरू की गई चीता पुनर्बसाहट योजना पूरी तरह सफल दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने
बताया कि भारत में इस परियोजना को शुरू हुए लगभग साढ़े तीन वर्ष हो चुके हैं और इस
अवधि में चीतों की संख्या निरंतर बढ़ी है।
वैश्विक
जैव विविधता मंच पर भारत की पहल
केन्द्रीय वन
मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत के प्रयासों से विश्व स्तर पर जैव विविधता
संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य किया जा रहा है और 97 देश इस मंच के सदस्य बन चुके
हैं। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूत कर रही है,
बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी नई दिशा दे रही है।
विशेषज्ञ
दल से चर्चा
कार्यक्रम के
बाद केंद्रीय मंत्री ने बोत्सवाना से आए चीता विशेषज्ञ दल से मुलाकात कर परियोजना
की प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस अवसर पर उन्हें कूनो नेशनल पार्क की
ओर से स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए।
जनप्रतिनिधियों
और अधिकारियों की उपस्थिति
इस अवसर पर
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद
शिवमंगल सिंह तोमर, सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष
(कैबिनेट मंत्री दर्जा) तुरसनपाल बरैया, पूर्व मंत्री
रामनिवास रावत सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भारत सरकार
के महानिदेशक वन्यजीव सुशील कुमार अवस्थी, प्रमुख
सचिव वन संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ
फॉरेस्ट फोर्स वी.एन. अम्बाडे तथा कमिश्नर सुरेश कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी भी
कार्यक्रम में मौजूद रहे।
संरक्षण
की दिशा में ऐतिहासिक पहल
कूनो में
चीतों की पुनर्बसाहट को देश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा
रहा है। वर्षों पहले भारत से विलुप्त हो चुके चीतों की वापसी न केवल पर्यावरणीय
संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि
यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संरक्षण प्रयासों की सफलता का भी प्रतीक है।
चीता
प्रोजेक्ट सिर्फ एक वन्यजीव पुनर्बसाहट योजना नहीं है,
बल्कि यह प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने की एक दीर्घकालिक पहल है।
चीतों की वापसी से घास के मैदानों का संरक्षण बेहतर होगा, शिकार
प्रजातियों का संतुलन बना रहेगा और क्षेत्र की स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा
मिलेगा।
The News Grit, 03/03/2026


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