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अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज, दक्षिण सागर में एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस संपन्न!!

सागर। वनमंडल दक्षिण सागर में पहली बार एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस 2026 का आयोजन 03 एवं 04 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक किया गया। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत झीलों, तालाबों, नदियों और अन्य जल स्रोतों में पाए जाने वाले जलीय पक्षियों की गणना की जाती है।

एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस का मुख्य उद्देश्य जलीय पक्षियों की संख्या, प्रजातीय विविधता तथा जल स्थलों की पारिस्थितिक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करना है, ताकि जलीय पक्षियों के संरक्षण, प्रबंधन और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए ठोस आधार तैयार किया जा सके।

09 तालाबों में हुआ सर्वेक्षण

एशियन वॉटर बर्ड्स सेंसस 2026 के अंतर्गत वनमंडल दक्षिण सागर क्षेत्र के कुल 09 तालाबों का सर्वेक्षण किया गया। इस कार्य के लिए 04 सर्वेक्षण दलों का गठन किया गया, जिनमें वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। सर्वेक्षण के दौरान दलों द्वारा जलाशयों के किनारों तक पहुँचकर जलीय पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों, उनकी संख्या, गतिविधियों तथा उनके प्राकृतिक आवास की स्थिति का बारीकी से अवलोकन कर रिकॉर्ड तैयार किया गया।

82 से अधिक जलीय पक्षी प्रजातियों की पहचान

सर्वेक्षण के दौरान वनमंडल दक्षिण सागर क्षेत्र में लगभग 82 विभिन्न प्रजातियों के जलीय पक्षियों की पहचान की गई, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है। इसके साथ ही कई दुर्लभ एवं प्रवासी एशियाई जलीय पक्षी प्रजातियाँ भी देखने को मिलीं, जिनमें प्रमुख रूप से रिवर टर्न, रूडी शेल डक, लिटिल रिंग्ड प्लोवर, साइबेरियन स्टोनचैट, बुलीनेक स्टॉर्क, ब्लैक रेडस्टार्ट, रेड नेप्ड आइबिस, ब्लैक हेडेड आइबिस शामिल हैं।

संरक्षण की दिशा में अहम कदम

वनमंडल दक्षिण सागर में पहली बार आयोजित यह सर्वेक्षण क्षेत्र में जलीय पक्षियों की उपस्थिति और जल स्थलों की पारिस्थितिकी को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे भविष्य में पक्षी संरक्षण, जल स्रोतों के प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

The News Grit, 06/01/2026

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