Skip to main content

बिजली चोरी के लंबित प्रकरणों के निपटारे का मौका, 14 मार्च को लगेगी लोक अदालत!!

भ्रष्टाचार के खिलाफ रिपोर्टिंग बनी जानलेवा, सेप्टिक टैंक में मिला पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव!!

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु ने राज्य में हड़कंप मचा दिया है। 33 वर्षीय मुकेश का शव 3 जनवरी 2025 को एक ठेकेदार के परिसर में स्थित सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। वे 1 जनवरी की रात से लापता थे। 
Source Internet
मुकेश चंद्राकर एक साहसी पत्रकार थे, जो पुलिस और नक्सलियों के बीच संपर्क सूत्र के रूप में भी जाने जाते थे। उन्होंने ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के खिलाफ सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग की थी। स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि इसी कारण उनकी हत्या की गई। मुकेश की अंतिम लोकेशन भी ठेकेदार के परिसर की ही पाई गई थी।
पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से दो ठेकेदार के रिश्तेदार हैं। मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर अभी भी फरार है, और पुलिस की चार टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। 

इस घटना ने राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पत्रकार समुदाय ने मुकेश की हत्या की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वे यह भी मांग कर रहे हैं कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पुलिस को मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार पर कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल होने का आरोप लगाया है और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
मुकेश चंद्राकर की हत्या ने राज्य में पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि सच्चाई की खोज में जुटे पत्रकारों को किस प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय करते हैं।
इस बीच, मुकेश के परिवार और सहयोगियों को न्याय की उम्मीद है, ताकि उनके प्रियजन की आत्मा को शांति मिल सके और पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत अन्य लोग बिना भय के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।

- The News Grit, 05/01/2025

Comments

Popular posts from this blog

प्रोजेक्ट आरोहण: NHAI की नई योजना, लेकिन किसके लिए?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( NHAI) ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल करते हुए टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और करियर निर्माण के लिए ‘प्रोजेक्ट आरोहण’ की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ एनएचएआई के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार यादव ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में किया। इस अवसर पर वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक एवं संयुक्त सीईओ डॉ. जफर खान और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिक्षा तक समान पहुँच देने का प्रयास एनएचएआई ने वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के साथ मिलकर यह योजना शुरू की है , जिसका मकसद टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को दूर करना , सामाजिक-आर्थिक भेदों को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों , जिनमें निम्न-आय वाले परिवारों की लड़कियाँ , पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी तथा अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र शामिल हैं , के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच प्रदान करना है। एनएचएआई का मानना है कि शिक्षा ही वह साध...

अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाया, लाखों नौकरियों पर संकट!!

अमेरिका ने बुधवार से भारत से आने वाले अधिकांश आयातित उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा ( CBP) द्वारा जारी नोटिस के बाद प्रभावी हुआ , जिसमें कहा गया था कि यह आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 6 अगस्त 2025 के कार्यकारी आदेश 14329 के तहत लागू किया जा रहा है। इस आदेश का शीर्षक था – “रूसी संघ की सरकार द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए खतरों को संबोधित करना।” किन उत्पादों पर लागू और किन्हें छूट सीबीपी के अनुसार , यह शुल्क उन सभी भारतीय वस्तुओं पर लागू होगा जो अमेरिका में उपभोग के लिए आयातित की जाती हैं। हालांकि , लोहा , इस्पात , एल्युमीनियम , वाहन , तांबा और इनके कुछ व्युत्पन्न उत्पादों को इस अतिरिक्त ड्यूटी से बाहर रखा गया है। वहीं , अमेरिकी बाजार में भारत के करीब 30.2% निर्यात (लगभग 27.6 अरब डॉलर) को शुल्क मुक्त प्रवेश मिलता रहेगा। इसमें फार्मा ( 12.7 अरब डॉलर) , इलेक्ट्रॉनिक्स ( 8.18 अरब डॉलर) , रिफाइंड लाइट ऑयल और एविएशन टरबाइन फ्यूल ( 3.29 अरब डॉलर) , पुस्तकें और ब्रोशर ( 165.9 मिलियन डॉलर) तथा प्लास्टिक ( 155.1 मिलियन...

बढ़ते एशिया को रोकने में कोरियाई उपमहाद्वीप की उथल पुथल के भरोसे अमरीकी थिंकटैंक!!

आधुनिक वित्तीय और आर्थिक प्रणाली औपनिवेशिक यूरोप और नवऔपनिवेशिक अमरीकी आधिपत्य की देन है। किंतु 21 वीं सदी आते-आते एशिया की नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं चीन , भारत , जापान , कोरिया , वियतनाम , इंडोनेशिया आदि ने यह साबित कर दिया कि यह सदी एशिया की है। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एशिया में बढ़ते प्रभाव और असंतुलन को देखते हुए लगातार तनावपूर्ण बयानबाज़ी कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से उनकी हालिया मुलाक़ात इसी पृष्ठभूमि में बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। शांति की पहल और ट्रम्प टॉवर का सपना व्हाइट हाउस में हुई मुलाक़ात के दौरान दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन से संवाद स्थापित करने की इच्छा जताई। ली ने कहा कि यदि विभाजित कोरिया में शांति स्थापित हो जाती है तो यह ऐतिहासिक होगा। उन्होंने व्यंग्य और संकेत दोनों में जोड़ा कि “आप (ट्रम्प) उत्तर कोरिया में ट्रम्प टॉवर बना सकते हैं , जहाँ मैं आकर गोल्फ़ खेलूँगा।” ट्रम्प ने भी पुरानी मित्रता याद दिलाई और कहा कि वे किम जोंग उन से पहले ही तीन बार मिल चुके हैं और भविष्य में दोबारा मिलन...