Skip to main content

इंदौर में पहली बार टैंडम पैराग्लाइडिंग फेस्टिवल, आसमान में उड़ान का रोमांच!!

अब हर मददगार बनेगा हीरो – सड़क सुरक्षा में नागरिकों की मदद को प्रोत्साहन!!!!

भारत में सड़क दुर्घटना एक गंभीर मामला रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में घायल होते या मारे जाते हैं, जिनमें से कई की मृत्यु इसलिए हो जाती है, क्योंकि समय पर उन्हें प्राथमिक उपचार या अस्पताल नहीं मिल पाता।

ऐसे में केंद्र सरकार ने 2021 में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए "गुड सेमेरिटन योजना" की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों की जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित और सुरक्षित करना है। इसी के साथ मध्यप्रदेश सरकार ने इस योजना को अपनी स्वीकृति देकर प्रदेश में लागू करने की घोषणा की है। जिसे 2025 में मई के अंत तक शु‍रू किया जाएगा। जिसमें प्रोत्‍साहन राशि 25 हजार देने की बात कही गई है। 

भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा 15 अक्टूबर 2021 से इस महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित करना है। इस योजना का नाम है – ‘गुड सेमेरिटन को पुरस्कार देने की योजना’, जो ऐसे नागरिकों को प्रोत्साहित करती है जो ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद का वह एक घंटा जिसमें तत्काल इलाज से जान बचाई जा सकती है) के भीतर घायल व्यक्ति को अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

इस योजना का मुख्‍य उछेश्‍य

इस योजना के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए प्रेरित करना है, ताकि भय या कानूनी झंझटों के डर से लोग मदद से पीछे न हटें। यह पहल न केवल समाज में सामाजिक उत्तरदायित्व और परोपकार की भावना को मजबूत करती है, बल्कि कानूनी सुरक्षा और आर्थिक प्रोत्साहन के माध्यम से लोगों को ऐसे परोपकारी कार्यों के लिए आगे आने को भी प्रेरित करती है।

योजना के प्रमुख बिंदु

'गुड सेमेरिटन' योजना के अंतर्गत किसी भी ऐसे व्यक्ति को पात्र माना जाता है, जिसने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर यानी दुर्घटना के एक घंटे के भीतर अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद की हो। गोल्डन ऑवर वह समय होता है। जब त्वरित चिकित्सा सहायता से मृत्यु को रोका जा सकता है। घायल की गंभीरता की शर्तों में निम्न में से कोई एक स्थिति शामिल होनी चाहिए जैसे- ऑपरेशन की आवश्यकता, कम से कम तीन दिन को अस्पताल में भर्ती होना, या सिर अथवा रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगना।

ऐसे नेक कार्य के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रति घटना ₹5,000 नकद राशि और प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, हर वर्ष देशभर से 10 सबसे उत्कृष्ट ‘गुड सेमेरिटन’ को राष्ट्रीय स्तर पर चुना जाएगा, जिन्हें ₹1,00,000 की पुरस्कार राशि, एक ट्रॉफी और सम्मान समारोह में विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। 29 सितंबर 2020 को जारी अधिसूचना के अनुसार, मदद करने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही या पूछताछ से छूट दी गई है, जिससे लोग बिना किसी डर के मदद के लिए आगे आ सकें। एक व्यक्ति को इस योजना के अंतर्गत एक वर्ष में अधिकतम 5 बार पुरस्कार दिया जा सकता है।

कार्यान्वयन प्रक्रिया

·         घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस या अस्पताल को दी जाती है।

·       पुलिस या अस्पताल एक प्रमाण-पत्र (Acknowledgement) जारी करते हैं जिसमें मदद करने वाले का नाम, पता, समय, घटना विवरण होता है।

·         यह जानकारी जिला स्तर की मूल्यांकन समिति को भेजी जाती है जिसमें कलेक्टर, SP, CMOH और RTO शामिल होते हैं।

·         समिति हर महीने योग्य नामों को मंजूरी देती है।

·         राज्य परिवहन विभाग उनके खाते में सीधे पुरस्कार राशि भेजता है।

·         केंद्र सरकार को पोर्टल के माध्यम से जानकारी भेजकर राशि की प्रतिपूर्ति प्राप्त होती है।

क्यों ज़रूरी था यह निर्णय?

यह निर्णय इसलिए ज़रूरी था, क्योंकि अक्सर देखा गया है कि लोग सड़क हादसे में घायल व्यक्तियों की मदद करने से हिचकते हैं। इसका मुख्य कारण यह डर होता है कि कहीं उन्हें पुलिस पूछताछ या कानूनी प्रक्रिया में उलझना न पड़े। कई मामलों में लोग हादसे के गवाह होने के डर से भी दूर रहना पसंद करते हैं, जिससे घायल को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और उसकी जान जोखिम में पड़ जाती है। सरकार की इस योजना से अब ऐसे मददगार नागरिकों को न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उन्हें सम्मान और आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। यह कदम समाज में परोपकार की भावना को मजबूत करेगा और लोगों को बिना डर के घायल की मदद करने के लिए प्रेरित करेगा।

सड़क हादसों में घायल लोगों की जान बचाना न केवल मानवीय कर्तव्य है, बल्कि अब यह सरकार द्वारा सराहा जाने वाला कार्य भी बन गया है। 'गुड सेमेरिटन' योजना आम नागरिकों को यह भरोसा देती है कि अगर वे किसी की जान बचाने के लिए आगे आते हैं, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया से छूट मिलेगी और उनके परोपकारी कार्य का सम्मान भी किया जाएगा। यह न केवल समाज में संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी की भावना को बढ़ाता है, बल्कि एक जागरूक और सहयोगी नागरिक समाज के निर्माण की दिशा में भी बड़ा कदम है। अब समय है कि हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी सड़क हादसे में चुप न रहें, बल्कि मदद के लिए आगे आएं – क्योंकि एक जीवन बचाना सबसे बड़ा धर्म है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर और चिंताजनक समस्या बनी हुई हैं। "Accidental Deaths & Suicides in India – 2022" (ADSI 2022) रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में देशभर में कुल लगभग 4,46,768 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में लगभग 1,68,491 लोगों की मृत्यु हुई, जबकि लगभग 4,43,366 लोग घायल हुए। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश में सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस प्रयासों की आवश्यकता है और ऐसे में 'गुड सेमेरिटन' योजना जैसे कदम आम नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

The News Grit, 16/05/2025


Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

प्रोजेक्ट आरोहण: NHAI की नई योजना, लेकिन किसके लिए?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( NHAI) ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल करते हुए टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और करियर निर्माण के लिए ‘प्रोजेक्ट आरोहण’ की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ एनएचएआई के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार यादव ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में किया। इस अवसर पर वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक एवं संयुक्त सीईओ डॉ. जफर खान और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिक्षा तक समान पहुँच देने का प्रयास एनएचएआई ने वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के साथ मिलकर यह योजना शुरू की है , जिसका मकसद टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को दूर करना , सामाजिक-आर्थिक भेदों को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों , जिनमें निम्न-आय वाले परिवारों की लड़कियाँ , पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी तथा अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र शामिल हैं , के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच प्रदान करना है। एनएचएआई का मानना है कि शिक्षा ही वह साध...

बढ़ते एशिया को रोकने में कोरियाई उपमहाद्वीप की उथल पुथल के भरोसे अमरीकी थिंकटैंक!!

आधुनिक वित्तीय और आर्थिक प्रणाली औपनिवेशिक यूरोप और नवऔपनिवेशिक अमरीकी आधिपत्य की देन है। किंतु 21 वीं सदी आते-आते एशिया की नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं चीन , भारत , जापान , कोरिया , वियतनाम , इंडोनेशिया आदि ने यह साबित कर दिया कि यह सदी एशिया की है। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एशिया में बढ़ते प्रभाव और असंतुलन को देखते हुए लगातार तनावपूर्ण बयानबाज़ी कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से उनकी हालिया मुलाक़ात इसी पृष्ठभूमि में बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। शांति की पहल और ट्रम्प टॉवर का सपना व्हाइट हाउस में हुई मुलाक़ात के दौरान दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन से संवाद स्थापित करने की इच्छा जताई। ली ने कहा कि यदि विभाजित कोरिया में शांति स्थापित हो जाती है तो यह ऐतिहासिक होगा। उन्होंने व्यंग्य और संकेत दोनों में जोड़ा कि “आप (ट्रम्प) उत्तर कोरिया में ट्रम्प टॉवर बना सकते हैं , जहाँ मैं आकर गोल्फ़ खेलूँगा।” ट्रम्प ने भी पुरानी मित्रता याद दिलाई और कहा कि वे किम जोंग उन से पहले ही तीन बार मिल चुके हैं और भविष्य में दोबारा मिलन...

भोपाल बनेगा देश का स्पोर्ट्स साइंस और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग हब!!

खेल के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल करने और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देने की दिशा में मध्यप्रदेश एक बड़ा कदम उठा रहा है। खेल विभाग द्वारा नाथु बरखेड़ा स्थित स्पोर्ट्स सिटी में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एवं हाई-परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह सेंटर उन सभी आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी सुविधाओं से लैस होगा , जिनकी आज के समय में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को निखारने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में जरूरत होती है। इसमें खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता , मानसिक दृढ़ता , चोटों से बचाव , और कुल प्रदर्शन सुधार पर व्यापक रूप से काम किया जाएगा। क्यों जरूरी है स्पोर्ट्स साइंस सेंटर ? आज का खेल जगत बेहद तेज और चुनौतीपूर्ण हो गया है। सिर्फ प्रतिभा या अच्छी कोचिंग अब पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई खिलाड़ी , चाहे वे कितने ही प्रतिभाशाली हों , मनोवैज्ञानिक दबाव , तकनीकी कमी या चोटों की वजह से अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते। अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में सफलता के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकन...