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अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

नोम चोम्स्की: हमारे समय की अंतरात्मा और आलोचनात्मक विवेक की आवाज़!!!!

नोम चोम्स्की हमारे समय के सबसे प्रभावशाली बुद्धिजीवियों में से एक हैं। वे भाषा-विज्ञान, राजनीति, मीडिया आलोचना और वैश्विक सत्ता संरचनाओं पर अपने तीक्ष्ण विश्लेषण के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी सोच ने न केवल अकादमिक जगत को बल्कि आम जनमानस को भी झंकझोरा है। आज जब लोकतंत्र, स्वतंत्रता और न्याय की अवधारणाएं लगातार चुनौती के घेरे में हैं, तब चोम्स्की की वैचारिक स्पष्टता और नैतिक प्रतिबद्धता हमें दिशा देने का कार्य करती है। इसीलिए, यह लेख उनके विचारों और योगदान की प्रासंगिकता को समझने का एक विनम्र प्रयास है।

नोम चोम्स्की (Noam Chomsky) का जन्म 7 दिसंबर 1928 को फिलाडेल्फिया, अमेरिका में हुआ था। वे एक बहुचर्चित अमेरिकी भाषाविद्, दार्शनिक, राजनीतिक विचारक, सामाजिक आलोचक और मानवाधिकारों के प्रखर पक्षधर हैं। वे एमआईटी (Massachusetts Institute of Technology) में लंबे समय तक प्रोफेसर रहे हैं। चोम्स्की को आधुनिक भाषाविज्ञान का जनक माना जाता है। वे विश्लेषणात्मक दर्शन तथा मीडिया व राजनीति की आलोचनात्मक व्याख्या के लिए भी विख्यात हैं।

भाषाविज्ञान, राजनीतिक दर्शन और सामाजिक आलोचना, मीडिया विश्लेषण, विदेश नीति और युद्ध नीति की आलोचना आदि उनके शोध कार्य के प्रमुख विषय रहे हैं।

भाषाविज्ञान में योगदान

चोम्स्की ने 1950-60 के दशक में "Transformational-Generative Grammar" का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसने भाषाविज्ञान के अध्ययन को मौलिक रूप से बदल दिया। उन्होंने यह विचार दिया कि मानव मस्तिष्क में एक "Universal Grammar" होता है, जो भाषा सीखने की प्राकृतिक योग्यता देता है। भाषा केवल एक संप्रेषण माध्यम नहीं, बल्कि मानव चेतना और संज्ञानात्मक संरचना की कुंजी है। उनकी पुस्तक "Syntactic Structures" (1957) भाषाविज्ञान में क्रांतिकारी मानी जाती है। उनके कार्यों ने मनोविज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और संज्ञानात्मक विज्ञान में भी गहरा प्रभाव डाला।

राजनीतिक दृष्टिकोण

चोम्स्की वामपंथी दृष्टिकोण के प्रमुख प्रवक्ता हैं। वे अमेरिकी साम्राज्यवाद, पूंजीवाद, वैश्वीकरण और मीडिया के कॉरपोरेट नियंत्रण के मुखर आलोचक रहे हैं। उनकी कुछ प्रमुख राजनीतिक कृतियाँ: "Manufacturing Consent" (एडवर्ड हर्मन के साथ): इसमें बताया गया है कि कैसे मुख्यधारा मीडिया सरकार और पूंजीपतियों के हितों के अनुसार जनता की राय को नियंत्रित करता है। "Hegemony or Survival" अमेरिकी वैश्विक प्रभुत्व की आलोचना। "Who Rules the World?" वैश्विक सत्ता संरचनाओं पर आलोचनात्मक विश्लेषण। वे अमेरिका की विदेश नीति, विशेषकर वियतनाम युद्ध, इराक युद्ध, इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष, और तीसरी दुनिया के देशों में अमेरिकी हस्तक्षेप की कठोर आलोचना करते रहे हैं।

नोम चोम्स्की ने 1967 में प्रकाशित अपने प्रसिद्ध निबंध "The Responsibility of Intellectuals" में बुद्धिजीवियों की नैतिक जिम्मेदारी पर गहन विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने तर्क दिया कि जिनके पास विशेषाधिकार, संसाधन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, उनका कर्तव्य है कि वे सत्ता की झूठी बातों का पर्दाफाश करें और सच्चाई को उजागर करें। चोम्स्की ने वियतनाम युद्ध, अमेरिकी विदेश नीति, और मीडिया की भूमिका पर खुलकर आलोचना की, जिससे उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके विचारों के कारण मुख्यधारा मीडिया ने उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया, और उन्हें "अमेरिका विरोधी" या "विवादास्पद" करार दिया गया । इसके बावजूद, उन्होंने MIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में रहते हुए भी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। उन्होंने करों का भुगतान करने से इनकार किया और युद्ध के खिलाफ सक्रिय रूप से विरोध किया। चोम्स्की का मानना है कि बुद्धिजीवियों की जिम्मेदारी केवल आलोचना तक सीमित नहीं है; उन्हें न्याय और लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले आंदोलनों का समर्थन भी करना चाहिए  । उनके अनुसार, विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्तियों को अपनी स्थिति का उपयोग समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए करना चाहिए। इस प्रकार, नोम चोम्स्की ने न केवल अपने विचारों के माध्यम से सत्ता की आलोचना की, बल्कि व्यक्तिगत जोखिम उठाकर भी सच्चाई के पक्ष में खड़े रहे।  उनकी यह प्रतिबद्धता आज के समय में भी बुद्धिजीवियों के लिए एक प्रेरणा है।

नोम चोम्स्की के वे कथन जो हम आप सभी को अवश्य जानने चाहिए।

  •      "राष्ट्र स्वाभाविक रूप से गरीब नहीं होते हैं; बल्कि, यह उनके संसाधनों को नियंत्रित करने वाली प्रणालियाँ हैं जो विफल होती हैं।"
  •        "सत्य आपको दिया गया उपहार नहीं है; यह एक व्यक्तिगत खोज है जो आपके स्वयं के प्रयास की मांग करती है।"
  •        "नियंत्रण की एक क्लासिक रणनीति में बाहरी खतरे को गढ़ना शामिल है, जो नियंत्रकों की तुलना में अधिक खतरनाक प्रतीत होता है, जो तब खुद को जनता के रक्षक के रूप में पेश करते हैं।"
  •        "इतिहास का सबसे कठोर सबक यह बताता है कि अधिकार उदारता से नहीं दिए जाते हैं; उन्हें संघर्ष के माध्यम से हासिल किया जाता है।"
  •       "केवल 'महान व्यक्तियों' को सुर्खियों में लाने के लिए ऐतिहासिक आख्यानों को विकृत करना एक उद्देश्य पूरा करता है: यह लोगों में शक्तिहीनता की भावना पैदा करता है, यह विश्वास बढ़ाता है कि परिवर्तन केवल असाधारण व्यक्तियों द्वारा ही शुरू किया जा सकता है।"
  •       "दुनिया की जटिलता और अस्पष्टता परेशान करने वाली हो सकती है। हालाँकि, इस भ्रम का विरोध करने से बौद्धिक अनुरूपता पैदा होती है, जो केवल दूसरों के विचारों को प्रतिध्वनित करती है।"
  •        "किसी आबादी पर हावी होने के लिए, यह विश्वास पैदा करें कि उनकी पीड़ा स्वयं द्वारा उत्पन्न की गई है, और फिर खुद को उनकी परेशानियों के समाधान के रूप में पेश करें।"
  •       "पश्चिमी दुनिया अंततः अपनी सतही विचारधाराओं पर विलाप करेगी जो व्यक्तियों को उनके आंतरिक स्वभाव से अलग करती हैं। प्रामाणिक आस्था और विश्वास की खोज सर्वोपरि है।"
    The News Grit, 21/05/2025

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