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अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

प्रयागराज में मल्टी-फीडस्टॉक Bio-CNG प्‍लांट, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा!!

प्रयागराज में स्वच्छ भारत मिशन–अर्बन 2.0 के तहत कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के निरंतर प्रयासों के तहत शहर में एक अत्याधुनिक मल्टी-फीडस्टॉक Bio-CNG प्‍लांट का शुभारंभ किया गया है। यह प्‍लांट न केवल प्रयागराज के ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन में सहायक होगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी को भी सुदृढ़ करेगा। यह परियोजना देश के प्रमुख वेस्ट-टू-एनर्जी मॉडल्स में शामिल हो चुकी है और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल मानी जा रही है।

ऑर्गेनिक कचरे से स्वच्छ ऊर्जा: प्‍लांट की मुख्य क्षमता

प्रयागराज में विकसित इस आधुनिक Bio-CNG प्‍लांट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह विभिन्न प्रकार के कार्बनिक कचरे को संसाधित कर स्वच्छ ईंधन उत्पन्न करने में सक्षम है। संयंत्र की क्षमता 343 टन ऑर्गेनिक वेस्ट प्रतिदिन प्रोसेस करने की है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 21 टन प्रति दिन Bio-CNG का उत्पादन हो रहा है। प्‍लांट में नगर निगम प्रयागराज द्वारा लाए जा रहे गीले कचरे की मात्रा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। शुरुआती दौर में जहाँ केवल 7–8 मीट्रिक टन गीला कचरा उपलब्ध था, वहीं वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 125 मीट्रिक टन गीला कचरा इस संयंत्र तक पहुँच रहा है। इससे कचरा प्रबंधन की प्रभावशीलता बढ़ने के साथ उत्पादन क्षमता में भी निरंतर सुधार दर्ज किया जा रहा है।

मल्टी-फीडस्टॉक मॉडल बना परियोजना की पहचान

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका मल्टी-फीडस्टॉक मॉडल है। इसमें केवल नगर निगम के ठोस कचरे का ही नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले विभिन्न अवशेषों जैसे धान की पुआल, गोबर और पोल्ट्री लिटर का भी उपयोग किया जाता है। इन सभी अवशेषों को प्रोसेस कर कंप्रेस्ड Bio-Gas तैयार की जाती है।

इस मॉडल से दो प्रमुख लाभ मिल रहे हैं-

·         शहर के ठोस कचरे का अत्यधिक कुशल प्रबंधन

·         कृषि अवशेषों का उपयोग कर पराली जलाने जैसी पर्यावरणीय समस्या को कम करना

किसानों के लिए भी यह मॉडल अत्यंत लाभकारी साबित हो रहा है, क्योंकि इससे कृषि अवशेषों की मांग बढ़ी है और उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।

28 टन कम्पोस्ट प्रतिदिन: किसानों के लिए वरदान

Bio-CNG के अलावा यह अत्याधुनिक प्‍लांट प्रतिदिन 28 टन उच्च गुणवत्ता वाली कम्पोस्ट भी तैयार कर रहा है। इस कम्पोस्ट को स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनकी कृषि लागत में कमी आती है और Regenerative Farming को बढ़ावा मिलता है। कम्पोस्ट की उपलब्धता से किसानों में प्राकृतिक खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है, जो दीर्घकालिक रूप से पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता दोनों के लिए लाभकारी है।

थोक कचरे का समाधान और ऊर्जा आपूर्ति का विस्तार

यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित है, जिसके कारण यह शहर के विभिन्न व्यावसायिक संस्थानों जैसे होटल, रेस्टोरेंट, अपार्टमेंट और बड़ी संस्थाओं से उत्पन्न हो रहे थोक कचरे का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है। उत्पादित Bio-CNG को CBG-CGD Synchronization Scheme के तहत बेचा जा रहा है। इसे ईंधन कैस्केड रूट के माध्यम से ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। यह स्वच्छ ईंधन शहर के परिवहन क्षेत्र में उपयोग किया जा रहा है, जिससे डीजल और पेट्रोल पर निर्भरता घट रही है।

आगामी समय में इस प्‍लांट द्वारा तैयार गैस को 45,000 घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से पहुँचाने की भी योजना बनाई गई है। यह कदम न केवल घरेलू उपयोग के लिए सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराएगा, बल्कि शहर के ऊर्जा ढांचे को भी मजबूत करेगा। परियोजना के संचालन से लगभग 57,000 MT वार्षिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा योगदान होगा।

हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बड़ी उपलब्धि

प्रयागराज में इस अत्याधुनिक Bio-CNG प्‍लांट की स्थापना ने उत्तर प्रदेश को हरित ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक पहल है, बल्कि ‘कचरे से कंचन’ बनाने के लक्ष्य को साकार करने वाली एक उत्कृष्ट मिसाल भी पेश करती है।

कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, कृषि अवशेषों के दोहन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की यह सफल रणनीति देश के अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है। इस प्‍लांट की शुरुआत ने साफ कर दिया है कि शहरों का भविष्य केवल स्वच्छता में ही नहीं, बल्कि कचरे को संसाधन में बदलकर सतत विकास हासिल करने में भी निहित है।

The News Grit, 12/12/2025

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