मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल ऐरण अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। सागर जिले के बीना क्षेत्र में आयोजित तीन दिवसीय ऐरण महोत्सव के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि ऐरण को विश्व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र की समृद्धि बढ़ेगी। उन्होंने इसे “विरासत से विकास की उड़ान” करार दिया।
महोत्सव के
अवसर पर उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने ऐरण स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर का अवलोकन कर इसकी
ऐतिहासिक और कलात्मक विशेषताओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर
महोत्सवों के आयोजन के माध्यम से उनकी गरिमा बढ़ाने और पर्यटन को प्रोत्साहित करने
का कार्य कर रही है। निकट भविष्य में ऐरण एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र
के रूप में स्थापित होगा, जहाँ बड़ी संख्या में
देश-विदेश के पर्यटक आएंगे।
उपमुख्यमंत्री
ने कहा कि बीना नदी के तट पर स्थित होने के कारण ऐरण प्राकृतिक रूप से भी अत्यंत
रमणीय स्थल है। यहाँ स्थित लगभग 1700 वर्ष प्राचीन
विष्णु भगवान की प्रतिमा को देखकर यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि प्राचीन
काल के कलाकार कितने कुशल और दक्ष थे, जिन्होंने अद्भुत
नक्काशी के माध्यम से इन प्रतिमाओं को आकार दिया। ऐरण महोत्सव इतिहास और परंपरा को
आधुनिकता से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
उन्होंने यह
भी कहा कि इस महोत्सव से कला और संस्कृति को मंच मिलने के साथ-साथ लोगों को इसके
इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर मिल रहा है। बीना विधायक निर्मला
सप्रे ने कहा कि ऐरण महोत्सव न केवल बीना और बुंदेलखंड,
बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के गौरव का पुरातात्विक स्थल है, जिसने विश्व स्तर पर सागर जिले की पहचान स्थापित की है। उन्होंने बताया कि
4 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन
यादव द्वारा किया गया वादा आज ऐरण महोत्सव के आयोजन के माध्यम से पूरा हुआ है। ऐरण
बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि विश्व की महत्वपूर्ण धरोहर है।
बीना विधायक निर्मला
सप्रे ने ऐरण के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए जनसमुदाय से अपील
की कि ऐरण क्षेत्र में यदि किसी को भी कोई प्राचीन मूर्ति या पुरातात्विक अवशेष
प्राप्त हों, तो उन्हें पुरातत्व विभाग को
सौंपें, ताकि इस धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा
कि भविष्य में ऐरण एक बड़ा पर्यटन केंद्र बनेगा। महोत्सव के दौरान उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र
शुक्ल ने ऐरण में बीना नदी के तट पर गंगा आरती की। इस धार्मिक आयोजन में विधायक निर्मला
सप्रे सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
ऐरण:
एक अद्वितीय पुरातात्विक धरोहर
मध्यप्रदेश
के सागर जिले के बीना में स्थित ऐरण, गुप्त
एवं पूर्व-गुप्त काल के इतिहास को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक
स्थल है। यहाँ से प्राप्त एरण अभिलेख भारतीय इतिहास के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को
उजागर करते हैं।
भानुगुप्त का
सती स्तंभ लेख (510 ई.): यह भारत में
सती प्रथा का पहला पुरातात्विक प्रमाण है, जिसमें गुप्त शासक
भानुगुप्त के सेनापति गोपराज की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के सती होने का उल्लेख
मिलता है।
समुद्रगुप्त
का अभिलेख: इसमें एरण को एरकिण कहा गया है। यह अभिलेख,
जो वर्तमान में कोलकाता संग्रहालय में सुरक्षित है, बताता है कि एरण गुप्त साम्राज्य की एक महत्वपूर्ण सैन्य छावनी और स्वभोग
नगर था, जहाँ समुद्रगुप्त अपने परिवार के साथ रहे थे।
तोरमाण का
वराह प्रतिमा अभिलेख (लगभग 510 ई.): विष्णु
के वराह अवतार की प्रतिमा पर अंकित यह अभिलेख हूण शासक तोरमाण के मालवा शासन और उस
समय वैष्णव धर्म के प्रभाव को दर्शाता है।
बुधगुप्त का
अभिलेख: इससे यमुना और नर्मदा के बीच के क्षेत्र में महाराज सुरश्मिचन्द्र के शासन
का उल्लेख मिलता है, जो पूर्वी मालवा पर
गुप्त नियंत्रण को दर्शाता है।
ऐरण
का ऐतिहासिक महत्व
गुप्त काल
में एरण (एरकिण) एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र या राजधानी था। यहाँ से प्राप्त
विष्णु मंदिर, नरसिंह और वराह प्रतिमाएँ
गुप्तकालीन वैष्णव धर्म के विकास की साक्षी हैं। ऐरण प्राचीन भारत की प्रमुख
टकसालों में से एक रहा है, जहाँ से प्राप्त सिक्के इसके आर्थिक
महत्व को दर्शाते हैं। इसके अलावा नाग और शक शासकों के सिक्के भी यहाँ से मिले हैं,
जो इसके बहु-शासकीय इतिहास को प्रमाणित करते हैं।
पुरातत्व
विशेषज्ञों का सम्मान
ऐरण महोत्सव
के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री शुक्ल ने पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ
अधिकारी डॉ. मोहन चढ़ार तथा डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय,
सागर के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. नागेश दुबे को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। दोनों विद्वानों ने ऐरण
के विष्णु मंदिर, विभिन्न अवतारों और उनसे जुड़े पुरातात्विक
महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
ऐरण महोत्सव
और सरकार की पहल से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में ऐरण न केवल इतिहास और
संस्कृति का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन और
रोजगार के नए अवसरों के साथ क्षेत्रीय विकास की मजबूत आधारशिला भी रखेगा।
The News Grit, 16/01/2026


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