Skip to main content

बिजली चोरी के लंबित प्रकरणों के निपटारे का मौका, 14 मार्च को लगेगी लोक अदालत!!

श्याम बेनेगल: समानांतर हिंदी सिनेमा के अग्रणी!!

श्याम बेनेगल भारतीय सिनेमा के उन व्यक्तित्वों में से हैं, जिन्होंने अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण और समाज के ज्वलंत मुद्दों को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करने की अनूठी क्षमता के कारण सिनेमा की दिशा और धारणा को बदला। 1940 और 50 के दशक में भारतीय सिनेमा मुख्यतः मनोरंजन पर आधारित था, लेकिन 1970 के दशक में समानांतर सिनेमा आंदोलन ने समाज की वास्तविकताओं को दर्शाने का बीड़ा उठाया। श्याम बेनेगल इस आंदोलन के अग्रदूत बने और उन्होंने समानांतर सिनेमा को एक नई पहचान दी।

श्याम बेनेगल का जन्म 14 दिसंबर 1934 को आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में हुआ। उन्होंने उस समय की सामाजिक असमानताओं और आर्थिक विषमताओं को नजदीक से देखा, जो बाद में उनके सिनेमा का आधार बनी। बेनेगल ने मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक किया और सिनेमा की ओर रुख किया। शुरुआत में उन्होंने विज्ञापन फिल्मों का निर्देशन किया, जिससे उनके तकनीकी कौशल को धार मिली।

1974 में श्याम बेनेगल की पहली फीचर फिल्म 'अंकुर' रिलीज हुई। यह फिल्म एक ग्रामीण महिला के संघर्ष और सामाजिक असमानता को गहराई से चित्रित करती है। फिल्म ने न केवल आलोचकों का ध्यान खींचा बल्कि समाज में व्याप्त जातिगत और लैंगिक भेदभाव पर चर्चा को भी प्रेरित किया। इस फिल्म ने शबाना आज़मी जैसी अद्वितीय अभिनेत्री को भी लॉन्च किया। इसके बाद आईं 'निशांत' (1975), 'मंथन' (1976) और 'भूमिका' (1977) जैसी फिल्में, जिन्होंने समानांतर सिनेमा को मजबूती दी। इन फिल्मों में समाज के वंचित वर्गों, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण भारत की समस्याओं और आर्थिक विषमताओं को प्रमुखता से उजागर किया गया।

'मंथन' भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी अनूठी फंडिंग मॉडल के लिए जानी जाती है। इस फिल्म का निर्माण 5 लाख किसानों के छोटे-छोटे योगदान से हुआ था। यह फिल्म श्वेत क्रांति और सहकारी आंदोलन पर आधारित थी। व्यवसायिक सिनेमा के इतर श्याम बेनेगल की फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे यथार्थवादी हैं। उनकी फिल्मों में भव्य सेट और नाटकीय घटनाओं के बजाय साधारण इंसानों की कहानियां होती हैं। संवादों और अभिनय में प्राकृतिकता का होना उनकी फिल्मों का प्रमुख गुण है।

कहानी प्रस्तुतीकरण के अलावा श्याम बेनेगल का महत्वपूर्ण योगदान जिसे बार बार सराहा जाना चाहिए कि आपके द्वारा निर्मित फिल्मों से सिनेमा को शबाना आज़मी, स्मिता पाटिल, ओम पुरी, और नसीरुद्दीन शाह जैसे अभिनेता मिले। उनके निर्देशन में ये कलाकार न केवल चमके, बल्कि समानांतर सिनेमा की आत्मा बने। श्याम बेनेगल को उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार मिले। उन्हें पद्म श्री (1976), पद्म भूषण (1991), और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2005) से सम्मानित किया गया। उनकी फिल्मों ने कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीते। श्याम बेनेगल के सिनेमा का महत्व आज भी बना हुआ है। उन्होंने सिनेमा को मनोरंजन से आगे बढ़ाकर सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। उनकी फिल्में दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं और उन्हें समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के जीवन में झांकने का अवसर देती हैं।

श्याम बेनेगल ने अपने सिनेमा के माध्यम से न केवल समाज की सच्चाई को उजागर किया, बल्कि सिनेमा को समाज का दर्पण बनाया। उनकी फिल्मों ने यह साबित किया कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम भी हो सकता है। उनके योगदान के बिना समानांतर सिनेमा की कल्पना अधूरी है।


- The News Grit, 25/12/2024

Comments

Popular posts from this blog

प्रोजेक्ट आरोहण: NHAI की नई योजना, लेकिन किसके लिए?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ( NHAI) ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल करते हुए टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और करियर निर्माण के लिए ‘प्रोजेक्ट आरोहण’ की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ एनएचएआई के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार यादव ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में किया। इस अवसर पर वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के कार्यकारी निदेशक एवं संयुक्त सीईओ डॉ. जफर खान और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिक्षा तक समान पहुँच देने का प्रयास एनएचएआई ने वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के साथ मिलकर यह योजना शुरू की है , जिसका मकसद टोल प्लाज़ा कर्मचारियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को दूर करना , सामाजिक-आर्थिक भेदों को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों , जिनमें निम्न-आय वाले परिवारों की लड़कियाँ , पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी तथा अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र शामिल हैं , के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच प्रदान करना है। एनएचएआई का मानना है कि शिक्षा ही वह साध...

अमेरिका ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाया, लाखों नौकरियों पर संकट!!

अमेरिका ने बुधवार से भारत से आने वाले अधिकांश आयातित उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा ( CBP) द्वारा जारी नोटिस के बाद प्रभावी हुआ , जिसमें कहा गया था कि यह आदेश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 6 अगस्त 2025 के कार्यकारी आदेश 14329 के तहत लागू किया जा रहा है। इस आदेश का शीर्षक था – “रूसी संघ की सरकार द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए खतरों को संबोधित करना।” किन उत्पादों पर लागू और किन्हें छूट सीबीपी के अनुसार , यह शुल्क उन सभी भारतीय वस्तुओं पर लागू होगा जो अमेरिका में उपभोग के लिए आयातित की जाती हैं। हालांकि , लोहा , इस्पात , एल्युमीनियम , वाहन , तांबा और इनके कुछ व्युत्पन्न उत्पादों को इस अतिरिक्त ड्यूटी से बाहर रखा गया है। वहीं , अमेरिकी बाजार में भारत के करीब 30.2% निर्यात (लगभग 27.6 अरब डॉलर) को शुल्क मुक्त प्रवेश मिलता रहेगा। इसमें फार्मा ( 12.7 अरब डॉलर) , इलेक्ट्रॉनिक्स ( 8.18 अरब डॉलर) , रिफाइंड लाइट ऑयल और एविएशन टरबाइन फ्यूल ( 3.29 अरब डॉलर) , पुस्तकें और ब्रोशर ( 165.9 मिलियन डॉलर) तथा प्लास्टिक ( 155.1 मिलियन...

बढ़ते एशिया को रोकने में कोरियाई उपमहाद्वीप की उथल पुथल के भरोसे अमरीकी थिंकटैंक!!

आधुनिक वित्तीय और आर्थिक प्रणाली औपनिवेशिक यूरोप और नवऔपनिवेशिक अमरीकी आधिपत्य की देन है। किंतु 21 वीं सदी आते-आते एशिया की नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं चीन , भारत , जापान , कोरिया , वियतनाम , इंडोनेशिया आदि ने यह साबित कर दिया कि यह सदी एशिया की है। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एशिया में बढ़ते प्रभाव और असंतुलन को देखते हुए लगातार तनावपूर्ण बयानबाज़ी कर रहे हैं। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से उनकी हालिया मुलाक़ात इसी पृष्ठभूमि में बेहद महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। शांति की पहल और ट्रम्प टॉवर का सपना व्हाइट हाउस में हुई मुलाक़ात के दौरान दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन से संवाद स्थापित करने की इच्छा जताई। ली ने कहा कि यदि विभाजित कोरिया में शांति स्थापित हो जाती है तो यह ऐतिहासिक होगा। उन्होंने व्यंग्य और संकेत दोनों में जोड़ा कि “आप (ट्रम्प) उत्तर कोरिया में ट्रम्प टॉवर बना सकते हैं , जहाँ मैं आकर गोल्फ़ खेलूँगा।” ट्रम्प ने भी पुरानी मित्रता याद दिलाई और कहा कि वे किम जोंग उन से पहले ही तीन बार मिल चुके हैं और भविष्य में दोबारा मिलन...