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अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

गिग (डिलेवरी वर्कर्स) और प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स (ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स) के लिए सरकारी सुरक्षा चक्र की शुरुआत!!!!

आज के डिजिटल युग में हमारी ज़िंदगी को आसान बनाने वाले कई चेहरे हैं, कभी समय पर खाना पहुंचाने वाला डिलीवरी बॉय, कभी सफर को आरामदायक बनाने वाला कैब ड्राइवर, तो कभी ऑनलाइन सेवाएं देने वाला फ्रीलांसर। ये सभी गिग और प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स हैं, जो 24x7 मेहनत करके हमारी ज़रूरतें पूरी करते हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि इन मेहनतकशों के पास न तो कोई स्थायी नौकरी की सुरक्षा है और न ही किसी सामाजिक सुरक्षा योजना का सहारा।

वक़्त की यही माँग है कि जो लोग देश की अर्थव्यवस्था को ज़मीन से जोड़ते हैं, उन्हें भी पहचान, सम्मान और सुरक्षा मिले। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 7 से 17 अप्रैल 2025 तक गिग और प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत इन वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल और संबल योजना में जोड़कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की कोशिश की जा रही है।

ई-श्रम पोर्टल और संबल योजना

भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया ई-श्रम पोर्टल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, विशेषकर गिग और प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की पहल है। इस पोर्टल पर पंजीकरण के बाद श्रमिकों को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दिया जाता है, जिसके माध्यम से उन्हें कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाता है। ई-श्रम पोर्टल के तहत मिलने वाले ₹2 लाख के दुर्घटना बीमा का लाभ मुख्यतः दो स्थितियों में मिलता है: दुर्घटना में मृत्यु और पूर्ण विकलांगता. यदि श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, या उसे दोनों आँखों, दोनों हाथों या दोनों पैरों की स्थायी हानि होती है, तो उसके नॉमिनी या श्रमिक को ₹2 लाख की राशि दी जाती है, इसके अतिरिक्‍त सरकारी योजनाओं में सीधा लाभ प्राप्त करने की सुविधा, भविष्य की योजनाओं में प्राथमिकता, और एक स्थायी पहचान का प्रमाणपत्र शामिल है।

वहीं, संबल योजना मध्यप्रदेश सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को जीवन के विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इसके अंतर्गत सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, दुर्घटनावश मृत्यु पर ₹4 लाख, गंभीर बीमारी में सहायता, गर्भवती महिलाओं को मातृत्व सहायता। मातृत्व सहायता योजना में दो किस्तों में कुल 16,000 रुपये दिए जाते हैं। पहली किस्त 4,000 रुपये की होती है जो गर्भावस्था के दौरान चार प्रसव पूर्व जांच कराने पर मिलती है, और दूसरी किस्त 12,000 रुपये की होती है, जो सरकारी अस्पताल में प्रसव होने पर, नवजात शिशु को शीघ्र स्तनपान और पंजीयन कराने पर मिलती है। बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, और अंतिम संस्कार हेतु ₹5000 तक की सहायता दी जाती है। अब इन दोनों योजनाओं को मिलाकर गिग और प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स को दोहरे लाभ दिए जा रहे हैं, एक ओर पहचान और बीमा सुरक्षा (ई-श्रम के माध्यम से), तो दूसरी ओर सामाजिक और आर्थिक मदद (संबल योजना के तहत)। यह एक ऐसा सराहनीय कदम है जो लाखों श्रमिकों को न केवल सुरक्षित बनाएगा, बल्कि उन्हें देश के विकास की मुख्यधारा से भी जोड़ेगा।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) 

सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) का दायरा बढ़ाते हुए इन वर्कर्स को भी इसके अंतर्गत शामिल करने की घोषणा की है। इसका मतलब है कि अब गिग वर्कर्स और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्रत्येक वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। इससे पहले तक यह सुविधा सिर्फ गरीबी रेखा के नीचे आने वाले या चिन्हित वर्गों तक सीमित थी, लेकिन अब ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे कैब ड्राइवर, डिलीवरी एजेंट, फ्रीलांसर, घरेलू सेवा प्रदाता आदि) को भी इसका लाभ मिलेगा।

कौन-कौन गिग/प्लेटफॉर्म वर्कर की श्रेणी में आते हैं?

डिलीवरी एजेंट्स – Swiggy, Zomato, Blinkit, Amazon, Flipkart, Dunzo आदि से जुड़े। 

कैब/ऑटो ड्राइवर्स – Ola, Uber, Rapido, Meru आदि प्‍लेटफॉर्म पर कार्यरत ड्राइवर्स।

फ्रीलांसर प्रोफेशनल्स – Graphic designers, content writers, video editors, animators आदि (Upwork, Fiverr, Freelancer, Guru आदि प्‍लेटफॉर्म्स से जुड़े)

घरेलू सेवा प्रदाता – प्‍लंबर, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर, AC रिपेयर (Urban Company, Housejoy, TaskRabbit जैसे प्‍लेटफॉर्म्स पर कार्यरत)

फूड वेंडर्स / क्‍लाउड किचन वर्कर्स – जो ऑनलाइन ऑर्डर के ज़रिए फूड सप्‍लाई करते हैं

घरेलू सहायिका/हाउसकीपिंग स्टाफ – ऑनलाइन बुकिंग के ज़रिए सेवा देने वाले सर्विस प्रोवाइडर्स। 

ब्यूटी व स्पा थेरेपिस्ट – ऑन-डिमांड ब्यूटी सर्विसेज देने वाले (जैसे UrbanClap के ज़रिए)

ट्यूटर/एजुकेटर – जो Byju’s, Vedantu, Unacademy, Chegg जैसे ऑनलाइन एजुकेशन प्‍लेटफॉर्म पर पढ़ाने वाले ट्यूटर्स। 

ई-कॉमर्स सेलर्स/रिसेलर्स – Meesho, Amazon, Flipkart आदि प्‍लेटफॉर्म्स पर प्रोडक्ट्स बेचने वाली कंपनीयों के वर्कर्स। 

राइड शेयरिंग/बाइक टैक्सी ड्राइवर्स – Rapido, Yulu जैसे ऐप्स से जुड़े वर्कर्स। 

लॉजिस्टिक्स/कूरियर पार्टनर्स – Shadowfax, Delhivery, Ekart जैसी कंपनियों के साथ काम करने वाले वर्कर्स। 

ईवेंट/फोटोग्राफी प्रोफेशनल्स – जो BookMyShow, Gigzoe जैसे प्‍लेटफॉर्म्स से काम प्राप्त करते हैं

फिटनेस ट्रेनर/योगा इंस्ट्रक्टर – जो HealthifyMe, UrbanPro, या खुद के डिजिटल चैनलों के माध्यम से सेवा देते हैं, आदि प्‍लेटफार्म्‍स।

ई-श्रम और संबल योजना का लाभ ऐसे उठाएं

ई-श्रम पोर्टल और संबल योजना का लाभ उठाने के लिए गिग और प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स को सबसे पहले ई-श्रम पोर्टल (eshram.gov.in) पर पंजीकरण कराना आवश्यक है। इसके लिए आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण और व्‍यवसाय से जुड़ी सामान्य जानकारी की आवश्यकता होती है। पंजीकरण के बाद श्रमिक को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के साथ ई-श्रम कार्ड जारी किया जाता है, जिसके माध्यम से उसे ₹2 लाख तक का दुर्घटना बीमा, सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता और एक स्थायी डिजिटल पहचान जैसे लाभ मिलते हैं। इसके साथ ही, यदि श्रमिक मध्यप्रदेश का निवासी है, तो वह संबल योजना का भी लाभ उठा सकता है। संबल योजना में पंजीकरण के लिए लोक सेवा केंद्र, जन सेवा केंद्र, या sambal.mp.gov.in वेबसाइट के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। इसके तहत सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, दुर्घटना मृत्यु पर ₹4 लाख, गंभीर बीमारी में सहायता, मातृत्व सहायता, बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और अंतिम संस्कार हेतु ₹5000 तक की आर्थिक मदद दी जाती है। दोनों योजनाओं में पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और ई-श्रम कार्ड की प्रति आवश्यक होती है। जो श्रमिक इन योजनाओं से अब तक नहीं जुड़े हैं, वे 7 से 17 अप्रैल 2025 तक मध्यप्रदेश में आयोजित विशेष पंजीकरण शिविरों में जाकर मुफ्त में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों को सरकारी सुरक्षा चक्र से जोड़ना है, जिससे वे न सिर्फ सुरक्षित रहें बल्कि उन्हें उनके अधिकार भी प्राप्त हों।

गिग और प्‍लेटफॉर्म (ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स) लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें पहचान और सुरक्षा से वंचित रखा गया था। ई-श्रम पोर्टल और संबल योजना जैसे प्रयास अब इन श्रमिकों को सुनियोजित और सुरक्षित कार्यबल के रूप में स्थापित करने की दिशा में सार्थक कदम हैं। इन योजनाओं से जुड़कर न सिर्फ वे सरकारी सहायता का लाभ ले सकते हैं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित भी बना सकते हैं।

The News Grit, 11/04/2025

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