Skip to main content

अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए बड़ी पहल: अब मिलेगा कैशलेस इलाज, शुरू हुई “पीएम राहत” योजना!!

सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर और बिना आर्थिक बाधा के इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नई कैशलेस उपचार योजना “पीएम राहत” का शुभारंभ किया है। यह योजना सड़क हादसों के बाद गोल्डन आवर के भीतर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है, ताकि इलाज में देरी के कारण होने वाली मौतों को कम किया जा सके।

सड़क हादसों में मौतें कम करने पर फोकस

भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि घायल व्यक्ति को दुर्घटना के पहले एक घंटे (गोल्डन आवर) के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कर दिया जाए, तो लगभग 50% तक मौतें रोकी जा सकती हैं। नई “पीएम राहत” योजना इसी महत्वपूर्ण समय खिड़की पर आधारित है और तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप को संस्थागत रूप देने का प्रयास करती है।

112 हेल्पलाइन से सीधा जुड़ाव

योजना को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) की 112 हेल्पलाइन से जोड़ा गया है। सड़क दुर्घटना पीड़ित, राहगीर या प्रत्यक्षदर्शी कोई भी व्यक्ति 112 पर कॉल करके:

·         निकटतम नामित अस्पताल की जानकारी पा सकता है

·         एम्बुलेंस सहायता बुला सकता है

·         पुलिस और मेडिकल सिस्टम को तुरंत अलर्ट कर सकता है

इस एकीकृत व्यवस्था से पुलिस, आपातकालीन सेवाओं और अस्पतालों के बीच तेज समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

कितनी मिलेगी कैशलेस इलाज सुविधा

योजना के तहत किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई दुर्घटना के पात्र पीड़ित को:

·         दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक कैशलेस उपचार

·         प्रति व्यक्ति अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक इलाज

·         जीवन-घातक मामलों में अधिकतम 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन उपचार

·         गैर-जीवन-घातक मामलों में अधिकतम 24 घंटे तक स्टेबलाइजेशन उपचार

यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल सिस्टम और पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित पूरी प्रक्रिया

योजना को तकनीक आधारित ढांचे पर लागू किया जा रहा है। इसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ई-डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट प्लेटफॉर्म को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS 2.0) से जोड़ा गया है।

इस डिजिटल एकीकरण से निम्न पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक होगी:

·         दुर्घटना की सूचना दर्ज होना

·         अस्पताल में भर्ती

·         पुलिस सत्यापन

·         उपचार का रिकॉर्ड

·         दावा दाखिल करना

·         अंतिम भुगतान

निर्धारित समय सीमा के भीतर पुलिस पुष्टि भी अनिवार्य होगी, गंभीर मामलों में 48 घंटे और अन्य मामलों में 24 घंटे के भीतर।

अस्पतालों को भुगतान कैसे होगा

अस्पतालों को उपचार की प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) से की जाएगी।

·         यदि दोषी वाहन बीमित है - भुगतान बीमा कंपनियों के अंशदान से

·         यदि वाहन बिना बीमा या हिट एंड रन मामला है - भुगतान केंद्र सरकार के बजटीय प्रावधान से

·         राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा स्वीकृत दावों का भुगतान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा

·         इससे अस्पतालों को वित्तीय सुनिश्चितता मिलेगी और वे बिना हिचक दुर्घटना पीड़ितों का इलाज शुरू कर सकेंगे।

शिकायत निवारण की व्यवस्था

सड़क दुर्घटना पीड़ितों की शिकायतों के समाधान के लिए जिला स्तर पर व्यवस्था बनाई गई है। शिकायतों का निपटारा:

·         जिला कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट / उपायुक्त की अध्यक्षता वाली

·         जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित

·         शिकायत निवारण अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा

इससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और निगरानी सुनिश्चित होगी।

नागरिक-प्रथम शासन की दिशा में कदम

“पीएम राहत” योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी सड़क दुर्घटना पीड़ित सिर्फ पैसों की कमी के कारण जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रह जाए। कैशलेस, समयबद्ध और डिजिटल रूप से ट्रैक होने वाली यह व्यवस्था भारत की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

The News Grit,16/02/2026

Comments

Popular posts from this blog

गवेषणा समिति ने जरूरतमंद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें भेंट की

सागर बड़तूमा , 04 दिसंबर 2025: गवेषणा मानवोत्थान पर्यावरण तथा स्वास्थ्य जागरूकता समिति के सेवा प्रकल्प के अंतर्गत आज शासकीय अनुसूचित जाति महाविद्यालय कन्या छात्रावास और शासकीय अनुसूचित जाति सीनियर एवं जूनियर कन्या छात्रावास , बड़तूमा में जरूरतमंद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें भेंट की गईं। इस अवसर पर बच्चों ने गवेषणा समिति और उनके सहयोगियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। छात्रावास अधीक्षक , मैडम स्वाति ने डॉ. चंदन सिंह और संस्था के योगदान की सराहना की। उन्होंने बच्चों को जिज्ञासा लाइब्रेरी का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया , जिससे उन्हें अध्ययन और ज्ञानवर्धन का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम में गवेषणा समिति से डॉ. तरुण साहू और सोनू चौरसिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना और उनकी पढ़ाई में मदद करना था। गवेषणा समिति ऐसी पहल लगातार कर रही है , जिसमें केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण , मानव गरिमा के संवर्धन और अंगदान जैसी अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं। इस तरह की पहलों से बच्चों...

अंधविश्वास और तर्कशीलता पर हुआ गवेषणा संवाद, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट महिलाओं का सम्मान

सागर। गवेषणा मानवोत्थान , पर्यावरण तथा स्वास्थ्य जागरूकता समिति द्वारा “अंधविश्वास बनाम तर्कशीलता : भारतीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजघाट रोड तिली स्थित एक होटल के सभागार में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी , सामाजिक कार्यकर्ता और शहर के नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में तर्कशील समिति से जुड़े डॉ. बलविंदर बरनाला मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में समाज में प्रचलित अनेक अंधविश्वासों की चर्चा करते हुए तर्क , वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुभवजन्य प्रमाणों के माध्यम से उन्हें चुनौती दी। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता और वैज्ञानिक सोच का विकास ही अंधविश्वासों को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका है। संवाद के दौरान उन्होंने उपस्थित श्रोताओं से प्रश्न आमंत्रित किए और उनके समाधान भी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन डॉ. राजेश गौतम और डॉ. सुनील साहू ने किया। संवाद के दूसरे सत्र ...

औषधीय फसलों में मध्यप्रदेश का दबदबा, देश में 44% उत्पादन यहीं से!!

मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में वर्ष 2024-25 में कुल 46,837 हेक्टेयर क्षेत्र में ईसबगोल , अश्वगंधा , सफेद मूसली , कोलियस सहित कई महत्वपूर्ण औषधीय फसलों की खेती की गई है। औषधीय पौधों की बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग के चलते किसान पारंपरिक खेती से हटकर इन उच्च-मूल्य फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। राज्य के कृषि विभाग के अनुसार , वर्ष 2024-25 में लगभग 1.25 लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है। यह उत्पादन वर्ष 2021-22 के 1.16 लाख मीट्रिक टन की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। वहीं , बोनी क्षेत्र भी लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2022-23 में जहां 44,324 हेक्टेयर में बोनी हुई थी , वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 46,837 हेक्टेयर हो गया , यानी 2,512 हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। देश में 44% औषधीय उत्पादन मध्यप्रदेश में भारत में उत्पादित कुल औषधीय फसलों में से 44 प्रतिशत उत्पादन अकेले मध्यप्रदेश में होता है , जो राज्य की राष्ट्रीय भूमिका को रेखांकित करता है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को अनुदान , तकनीकी सहायता...