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मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन के जरिए राजमार्गों की मजबूती का ऑन-स्पॉट परीक्षण!!

मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन के जरिए राजमार्गों की मजबूती का ऑन-स्पॉट परीक्षण!!

देश में तेजी से फैल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के बीच अब फोकस सिर्फ लंबाई बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और भरोसेमंद निर्माण पर है। इसी दिशा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक अहम प्रायोगिक परियोजना शुरू की है, जिसके तहत मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन (MQCV) के माध्यम से निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्गों की मौके पर ही वैज्ञानिक जांच की जाएगी। यह पायलट प्रोजेक्ट चार राज्यों- राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और ओडिशा में लागू किया गया है।

क्या है इस पहल का उद्देश्य?

इन मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन का इस्तेमाल वर्तमान में जारी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी का जल्दी और सटीक पता लगाने के लिए किया जाएगा। हर मोबाइल वैन चलती-फिरती प्रयोगशाला की तरह कार्य करती है, जो अत्याधुनिक नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट्स से पूरी तरह लैस होती है। इस वैन में अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी मीटर, रिबाउंड हैमर, एस्फाल्ट डेंसिटी गेज और रिफ्लेक्टोमीटर इत्यादि शामिल हैं, जिनकी मदद से निर्माण कार्य को बिना नुकसान पहुंचाए मौके पर ही प्रभावी जांच संभव हो पाती है।

मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन: प्रयोगशाला सीधे राजमार्ग पर

एमक्यूसीवी में उन्नत तकनीकी उपकरणों का पूरा सेट मौजूद है, जो निर्माण में बाधा डाले बिना गुणवत्ता का मूल्यांकन करता है।

प्रमुख उपकरण और उनकी भूमिका

·         रिबाउंड हैमर- यह उपकरण सड़क या संरचना की सतह की कठोरता मापता है और साइट पर बने कंक्रीट की मजबूती का अनुमान देता है।

·         अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी मीटर- यह कंक्रीट में ध्वनि तरंगें भेजकर अंदर छिपी दरारों, खाली स्थानों और खामियों का पता लगाता है।

·         एस्फाल्ट डेंसिटी गेज- ये पोर्टेबल डिवाइस हैं जो सही एस्फाल्ट कॉम्पैक्शन और पेवमेंट की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए साइट पर तेजी से, नॉन-न्यूक्लियर टेस्टिंग करना सुगम बनाते हैं।

·         लाइट-वेट डिफ्लेक्टोमीटर- यह उपकरण कॉम्पैक्ट मिट्टी और दानेदार सब-बेस की घनत्व क्षमता का अनुमान लगाता है, ताकि लंबे समय तक चलने वाले राजमार्गों के लिए स्थिर आधार सुनिश्चित किया जा सके।

·         रिफ्लेक्टोमीटर- यह सड़क के संकेतों और चिह्नों की दृश्यता की जांच करता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सड़क चिह्न दिन और रात दोनों समय स्पष्ट रूप से दिखाई दें।

गुणवत्ता नियंत्रण में बड़ा बदलाव

इन सभी तकनीकों का संयुक्त उपयोग गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को रिएक्टिव (समस्या के बाद कार्रवाई) से बदलकर अतिसक्रिय और पूर्व-निवारक (प्रो-एक्टिव) बना देता है। अब सड़कें केवल निरीक्षण रिपोर्टों पर नहीं, बल्कि वास्तविक समय के डेटा, डायग्नोस्टिक्स और ऑन-साइट विश्लेषण के आधार पर परखी जाएंगी। इससे सुरक्षा, टिकाऊपन और सार्वजनिक भरोसे को मजबूती मिलेगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही की नई व्यवस्था

परीक्षण के निष्कर्ष मंत्रालय अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ साझा करेगा और यदि गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है, तो संबंधित क्षेत्र कार्यालय आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। जैसे-जैसे यह प्रायोगिक परियोजना अगले चरण में प्रवेश करेगी, मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्ग गुणवत्ता निगरानी पोर्टल विकसित कर रहा है, जो मोबाइल वैन से तैयार की गई टेस्ट रिपोर्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। यह पोर्टल मोबाइल वैन की रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा भी प्रदान करेगा, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर गुणवत्ता जांच की पारदर्शी निगरानी और आंकड़ों के आधार पर प्रभावी अनुवीक्षण संभव हो सकेगा।

अगले चरण की तैयारी

मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली का विस्तार जल्द ही अन्य राज्यों में किया जाएगा। मंत्रालय ने अगले चरण में 11 राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और मेघालय में एमक्यूसीवी लागू करने की योजना बनाई है। इस चरण के लिए निविदाएं पहले ही आमंत्रित की जा चुकी हैं और उम्मीद है कि जून 2026 तक ये मोबाइल वैन संचालन शुरू कर देंगी।

क्या बदलेगा इस पहल से?

यह पहल भारत के राजमार्ग विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि अब केवल सड़क निर्माण की गति ही नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता भी प्राथमिकता में होगी। इससे निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ेगी और कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी बनेगी। परिणामस्वरूप यात्रियों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद सड़कें मिलेंगी। सरल शब्दों में कहें तो अब भारत के राजमार्ग केवल वादों पर नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और पारदर्शी निगरानी के आधार पर तैयार होंगे। यह पहल इस बात का संकेत है कि देश में बुनियादी ढांचा विकास अब केवल विस्तार नहीं, बल्कि उत्कृष्टता और विश्व स्तरीय मानकों की ओर बढ़ रहा है।

The News Grit, 24/02/2026

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